Iran Currency Crisis: ईरान में डॉलर के मुकाबले रियाल धड़ाम, सेंट्रल बैंक गवर्नर ने अमेरिकी प्रोपेगैंडा बताया।

ईरान के सेंट्रल बैंक गवर्नर Abdolnaser Hemmati ने हाल ही में देश की मुद्रा में आई भारी गिरावट को एक अस्थायी और सामान्य उतार-चढ़ाव करार दिया है। उन्होंने सीधे तौर पर अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि यह सब अमेरिकी राजनीतिक प्रोपेगैंडा का हिस्सा है जिसकी वजह से अर्थव्यवस्था पर दबाव बन रहा है। सेंट्रल बैंक के गवर्नर ने आम जनता को भरोसा दिलाया है कि बैंक के पास विदेशी मुद्रा का पर्याप्त भंडार सुरक्षित है जो लोगों की आजीविका की रक्षा करने के पूरी तरह सक्षम है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि बैंक बिना किसी नए नोट छापे उत्पादन को वित्तपोषित करने के लिए 700 trillion tomans की राशि आवंटित करेगा।
ईरान में मुद्रा की स्थिति और आंकड़े
आंकड़ों के अनुसार 24 August 2026 को ईरानी रियाल ब्लैक मार्केट में गिरकर पहली बार प्रति अमेरिकी डॉलर 2 million rials के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। दूसरी तरफ सेंट्रल बैंक का आधिकारिक विनिमय दर लगभग 1.5 million rials प्रति डॉलर दर्ज किया गया। पिछले सिर्फ दो हफ्तों के भीतर ही इस मुद्रा ने अपनी वैल्यू का लगभग 10% हिस्सा गंवा दिया है। सेंट्रल बैंक के गवर्नर ने जानकारी दी कि उन्होंने साल की शुरुआत से लेकर अब तक हर दिन औसतन $175 million विदेशी मुद्रा मुहैया कराई है, जबकि साल 2025 की समान अवधि में यह आंकड़ा प्रतिदिन $205 million था। इसके अलावा साल के अंत तक औद्योगिक सेक्टर को कुल $20 billion विदेशी मुद्रा वितरित करने की योजना बनाई गई है।
अमेरिका की नई पाबंदियां और सरकारी प्रतिक्रिया
दूसरी तरफ अमेरिका के ट्रेजरी सचिव Scott Bessent इतिहास के सबसे बड़े समन्वित आर्थिक अलगाव अभियान की तैयारी कर रहे हैं जिसे उन्होंने आर्थिक डी-डे नाम दिया है। इन संभावित उपायों के तहत उन देशों को भी निशाना बनाया जाएगा जो ईरान के साथ अपना व्यापारिक रिश्ता जारी रखेंगे। इस अमेरिकी रणनीति के जवाब में ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख Mohsen Rezaei ने कड़ी चेतावनी दी कि जो भी देश अमेरिका की इन नई आर्थिक कार्रवाइयों का समर्थन करेगा उसे युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा। इससे पहले 20 August को संसद के स्पीकर Mohammad-Bagher Ghalibaf ने भी चेतावनी दी थी कि अगर देश के नागरिकों को भूखा रहना पड़ा और आर्थिक विकास नहीं हुआ तो ईरान का टिक पाना बहुत मुश्किल हो जाएगा। आम जनता में भी इसको लेकर गुस्सा लगातार बढ़ रहा है और 23 August को कई शहरों में सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया तथा विदेशी नीति की विफलताओं को घरेलू तंगी से जोड़ा।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की रिपोर्ट और घरेलू दबाव
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF के अनुमान के मुताबिक साल 2026 में ईरान की वास्तविक जीडीपी में 5.4% की बड़ी गिरावट दर्ज की जा सकती है। इसके साथ ही उपभोक्ता कीमतों में 68.9% तक का भारी उछाल आने की आशंका जताई गई है। हालांकि सेंट्रल बैंक ने साल 2026 में समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष के लिए 77 trillion tomans के शुद्ध लाभ की घोषणा की है जिसे मुद्रा के अवमूल्यन और बिना बैकिंग के छापे गए नोटों से जोड़ा गया है। इसके बावजूद बैंक पर वित्तीय दबाव लगातार बना हुआ है। 22 August को गवर्नर Hemmati ने जरूरी वस्तुओं पर मिलने वाली सब्सिडी के इलेक्ट्रॉनिक बास्केट में 23% की बढ़ोतरी का ऐलान किया, जबकि पिछले एक साल में उन बुनियादी सामानों की वास्तविक कीमत में 66% की वृद्धि हो चुकी है।