ईरान के सैन्य कमांड ने इसराइल के खिलाफ अपने ताज़ा सैन्य अभियान को रोकने की घोषणा की है। ईरान की सेना का कहना है कि यह कदम इसराइल द्वारा लेबनान में किए गए हमलों के जवाब में उठाया गया था। हालांकि, ईरान ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि अगर इसराइल ने लेबनान पर फिर से हमला किया, तो उसे इससे भी अधिक गंभीर और विनाशकारी जवाब का सामना करना पड़ेगा। इस बड़े सैन्य तनाव के बीच कुवैत और बहरीन ने भी अपने देशों को निशाना बनाए जाने की कड़ी निंदा की है।
ईरान ने सैन्य अभियान रोकने के बाद क्या चेतावनी दी है?
ईरान की सशस्त्र सेना के Khatam al-Anbiya Central Headquarters ने बताया कि उन्होंने इसराइल के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई पूरी कर ली है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई इसराइल द्वारा दक्षिणी लेबनान और बेरुत के दहियाह इलाके में किए गए हमलों का एक दर्दनाक जवाब थी। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि इसराइल ने लेबनान में फिर से कोई हमला किया या अपनी सैन्य हरकतों को जारी रखा, तो ईरान इस बार और भी कड़ा और कुचलने वाला हमला करेगा। ईरान का कहना है कि युद्ध विराम पूरी तरह से विरोधी ताकतों के व्यवहार पर निर्भर करेगा।
इस सैन्य टकराव में अमेरिका और अन्य देशों की क्या भूमिका है?
इस पूरे विवाद पर अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दोनों देशों से तुरंत गोलाबारी रोकने की मांग की है। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि दोनों देश तुरंत सीजफायर चाहते हैं और शांति के लिए बातचीत आगे बढ़ रही है। इस बीच, कुवैत के विदेश मंत्रालय ने ईरान की तरफ से हुए हवाई हमलों की कड़ी निंदा की है और इसे अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए सीधा खतरा और संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। बहरीन ने भी खुद को निशाना बनाए जाने की जानकारी दी है। इसराइल के सैन्य अधिकारियों के अनुसार, ईरान ने लगभग 30 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं, जिसके जवाब में इसराइली वायुसेना ने ईरान के हवाई रक्षा प्रणालियों और एक पेट्रोकेमिकल परिसर पर हमला किया। यमन के हूती विद्रोहियों ने भी इसराइल पर मिसाइलें दागने की जिम्मेदारी ली है और लाल सागर में इसराइली जहाजों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ईरान ने इसराइल पर मिसाइल और ड्रोन हमले क्यों किए थे?
ईरान ने यह हमला दक्षिणी लेबनान और बेरुत के दहियाह इलाके में इसराइल द्वारा किए गए हवाई हमलों के जवाब में किया था। इसे ईरान ने इसराइली आक्रामकता का बदला बताया था।
इस तनाव पर अमेरिका और कुवैत का क्या रुख है?
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दोनों पक्षों से तुरंत हमले रोकने की अपील की है और बातचीत की वकालत की है। वहीं कुवैत ने ईरान के मिसाइल हमलों को अपनी सुरक्षा के लिए सीधा खतरा बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है।
