अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव को कम करने के लिए एक बड़ी कोशिश शुरू हुई है. ईरान का एक राजनयिक दल स्विट्जरलैंड पहुंचा है ताकि अमेरिका के साथ हुए समझौते (MoU) पर चर्चा की जा सके. इस बैठक का मुख्य मकसद युद्ध को रोकना और पुराने समझौतों को लागू करना है.
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क्या है यह 14 सूत्रीय समझौता
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump और ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने 17 जून 2026 को एक 14 सूत्रीय समझौता किया था. इस समझौते का सबसे बड़ा लक्ष्य सैन्य अभियानों को तुरंत और हमेशा के लिए रोकना है, खासकर लेबनान में चल रही जंग को खत्म करना. दोनों देशों ने इस बातचीत को पूरा करने के लिए 60 दिन का समय तय किया है.
समझौते की मुख्य शर्तें
- अमेरिका की जिम्मेदारी: अमेरिका अपनी नौसेना की नाकाबंदी और अन्य प्रतिबंधों को हटाना शुरू करेगा.
- ईरान की जिम्मेदारी: ईरान अगले 60 दिनों तक Strait of Hormuz से व्यापारिक जहाजों को बिना किसी रोक-टोक के आने-जाने देगा.
- भविष्य की बातें: आने वाले समय में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत, फ्रीज की गई संपत्ति की वापसी और तेल निर्यात पर चर्चा होगी.
बातचीत में देरी और नया शेड्यूल
शुरुआत में यह बैठक 19 जून 2026 को होनी थी, लेकिन इसराइल और हिजबुल्लाह के बीच लड़ाई तेज होने की वजह से इसे टाल दिया गया. अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने भी अपनी यात्रा रद्द कर दी थी. अब तकनीकी स्तर की बातचीत 21 जून 2026 को स्विट्जरलैंड के Burgenstock में होगी. अमेरिका की ओर से स्पेशल एनवॉय Steve Witkoff और Jared Kushner पहले ही वहां पहुंच चुके हैं.
ईरान और अमेरिका का रुख
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने साफ कहा है कि उनका दल अमेरिका पर दबाव बनाने गया है कि वह अपने वादों को पूरा करे. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने अपनी जिम्मेदारियां नहीं निभाईं, तो पूरा समझौता खतरे में पड़ सकता है. ईरान का कहना है कि अमेरिका को इसराइल को लेबनान पर हमला रोकने के लिए मजबूर करना चाहिए.
वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने भरोसा जताया है कि युद्धविराम कायम रहेगा और बातचीत सही दिशा में जा रही है.
मध्यस्थों की भूमिका और विवाद
इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान और कतर मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बताया कि रविवार को होने वाली तकनीकी बातचीत में दोनों देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे.
इसी बीच एक बड़ा विवाद भी सामने आया है. ईरान की Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने दावा किया कि अमेरिकी लापरवाही और लेबनान में हमलों की वजह से उन्होंने Strait of Hormuz को बंद कर दिया है. हालांकि, अमेरिकी कमांड (CENTCOM) ने इस बात को गलत बताया और कहा कि वहां जहाजों की आवाजाही वास्तव में बढ़ी है.