ईरान का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल शनिवार रात को स्विट्जरलैंड के ज़्यूरिख शहर पहुँचा है। इस मिशन का नेतृत्व संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf कर रहे हैं। यह यात्रा अमेरिका के साथ हुए पुराने समझौतों को पूरा करवाने और तकनीकी बातचीत के लिए की गई है।

इस्लामाबाद MoU और बातचीत का मकसद

इस मिशन को ‘Minab 168’ नाम दिया गया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने साफ़ किया है कि यह यात्रा किसी नए समझौते की शुरुआत नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य Islamabad MoU के तहत अमेरिका ने जो वादे किए थे, उन्हें पूरा करवाना है। ईरान का कहना है कि वह केवल ‘प्रतिबद्धता के बदले प्रतिबद्धता’ के सिद्धांत पर काम करेगा।

मीटिंग में शामिल प्रमुख चेहरे

ईरानी दल में विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi, सेंट्रल बैंक के गवर्नर Abdolnaser Hemmati और तेल मंत्री के डिप्टी Hamid Bourd समेत कई बड़े अधिकारी शामिल हैं। अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति JD Vance के आने की उम्मीद है, जबकि विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर पहले ही स्विट्जरलैंड पहुँच चुके हैं। इस बातचीत में कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। साथ ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख के भी यहाँ पहुँचने की संभावना है।

हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर तनाव

बातचीत के बीच ईरान ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से बंद करने की घोषणा की है। ईरान ने इसका कारण अमेरिका द्वारा युद्ध रोकने के समझौते का पालन न करना और लेबनान में बढ़ती हिंसा को बताया है। हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि ईरान का इस जलमार्ग पर कोई नियंत्रण नहीं है और जहाजों की आवाजाही जारी है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने साफ़ किया कि 60 दिनों के युद्धविराम के दौरान यहाँ कोई टोल नहीं लगेगा।

परमाणु साइट और संपत्ति का सौदा

सूत्रों के अनुसार, अमेरिका इस तकनीकी बातचीत के जरिए यह चाहता है कि IAEA ईरान के परमाणु ठिकानों की जांच करे। अगर ईरान इसके लिए राजी होता है, तो अमेरिका कतर में जमा ईरान की कई अरब डॉलर की संपत्ति छोड़ने के लिए तैयार है।