ईरान ने संयुक्त राष्ट्र (UN) में साफ़ कह दिया है कि जब तक उसे अमेरिका और इसराइल के हमलों से सुरक्षा की पक्की गारंटी नहीं मिलती, तब तक खाड़ी क्षेत्र (Gulf region) में शांति नहीं आ सकती. Strait of Hormuz को लेकर चल रहे विवाद ने अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ लिया है. अमेरिका और ईरान के बीच जुबानी जंग इतनी बढ़ गई है कि दोनों एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं.

ईरान ने UN में क्या मांग की है?

ईरान के राजदूत Amir Saeid Iravani ने UN Security Council की बैठक में कहा कि क्षेत्र में स्थिरता के लिए ईरान के खिलाफ होने वाले हमलों को पूरी तरह रोकना होगा. उन्होंने मांग की कि अमेरिका और इसराइल की तरफ से दोबारा हमले न होने की विश्वसनीय गारंटी दी जाए. ईरान का कहना है कि जब तक उसके संप्रभु अधिकारों का सम्मान नहीं होगा, तब तक शांति संभव नहीं है. बैठक के बाद Iravani ने अमेरिका पर जहाजों को पकड़ने और लुटेरों की तरह व्यवहार करने का आरोप भी लगाया.

Strait of Hormuz पर विवाद और ईरान का नया ऑफर क्या है?

इस विवाद की शुरुआत बहरीन द्वारा बुलायी गयी एक बैठक से हुई, जिसमें कई देशों ने Strait of Hormuz पर ईरान के नियंत्रण की निंदा की. अमेरिकी दूत Mike Waltz ने ईरान को अंतरराष्ट्रीय आपराधिक समुद्री लुटेरा कहा और आरोप लगाया कि वह परमाणु महत्वाकांक्षाओं के लिए इस रास्ते को मोहरे की तरह इस्तेमाल कर रहा है. इस तनाव के बीच ईरान ने एक नया प्रस्ताव दिया है. ईरान ने कहा कि अगर अमेरिका ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी खत्म कर दे, तो वह Strait of Hormuz को फिर से खोल देगा. हालांकि, ईरान ने साफ़ कर दिया है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम पर कोई रियायत नहीं देगा.

अन्य देशों और अधिकारियों का इस मुद्दे पर क्या स्टैंड है?

  • फ्रांस: विदेश मंत्री Jean-Noel Barrot ने कहा कि समाधान के लिए ईरान को बड़ी रियायतें देनी होंगी, हालांकि उन्होंने माना कि अमेरिका और इसराइल के ऑपरेशनों ने अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन किया है.
  • रूस: रूस ने UN में ईरान का समर्थन किया और इस बात पर आपत्ति जताई कि केवल ईरान को ही निशाना बनाया जा रहा है.
  • UN महासचिव: António Guterres ने परमाणु हथियारों के खतरे को लेकर दुनिया को आगाह किया और सभी देशों से एकजुट होने को कहा.
  • हिज़बुल्लाह: नेता Naim Qassem ने इसराइल के साथ किसी भी सीधी बातचीत को सिरे से खारिज कर दिया है.