ईरान और अमेरिका के बीच हुए शांति समझौते के बाद भी लेबनान में तनाव कम नहीं हो रहा है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास Araghchi ने साफ तौर पर कहा है कि इजराइल को लेबनान पर अपने हमले तुरंत बंद करने चाहिए। ईरान का मानना है कि इस समझौते को लागू करवाने की पूरी जिम्मेदारी अमेरिका की है।

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ईरानी विदेश मंत्री Araghchi ने लेबनान के संसद अध्यक्ष Nabih Berri से मुलाकात की और उन्हें अमेरिका-ईरान समझौते की उन शर्तों के बारे में बताया जो लेबनान से जुड़ी हैं। उन्होंने जोर दिया कि इस डील के तहत सभी मोर्चों पर जंग रुकनी चाहिए, जिसमें लेबनान भी शामिल है। इस समझौते को करवाने में पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी।

क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर Araghchi ने इराक, मिस्र, सऊदी अरब, तुर्की और जापान के विदेश मंत्रियों से भी फोन पर बात की। उन्होंने दुनिया को बताया कि अगर अमेरिका और अन्य गारंटी देने वाले देश इस समझौते का पालन नहीं करवाते हैं, तो यह गंभीर मामला होगा। ईरान के विदेश मंत्रालय ने पहले ही चेतावनी दी थी कि बेरूत के Dahiyeh इलाके में हुए इजरायली हमले के जिम्मेदार अमेरिका और इजराइल होंगे।

इजराइल का कड़ा रुख

दूसरी तरफ, इजराइल ने ईरान की इन मांगों को मानने से इनकार कर दिया है। इजरायली रक्षा मंत्री Israel Katz ने साफ कहा कि उनकी सेना लेबनान, सीरिया और गाजा के उन इलाकों से पीछे नहीं हटेगी जहाँ वे अभी मौजूद हैं। उनके मुताबिक, अमेरिका-ईरान शांति समझौते का असर उनकी सैन्य कार्रवाई पर नहीं पड़ेगा।

इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने भी अपनी बात दोहराई कि वह ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकेंगे और सुरक्षा क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी बनाए रखेंगे। वहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री Itamar Ben-Gvir ने इस डील की आलोचना करते हुए कहा कि डोनाल्ड Trump का यह समझौता तेल अवीव को बाध्य नहीं करता और उनका लक्ष्य हिजबुल्लाह को पूरी तरह खत्म करना है।

ईरान की सेना हाई अलर्ट पर

इस पूरे विवाद के बीच ईरान की सेना ने अपनी तैयारी तेज कर दी है। सैन्य अधिकारियों ने कहा कि वे हाई अलर्ट पर रहेंगे और अगर अमेरिका-ईरान समझौते का उल्लंघन हुआ, तो वे इसका जोरदार जवाब देंगे। ईरान किसी भी इजरायली सैन्य कार्रवाई को इस शांति समझौते की बड़ी नाकामी और उल्लंघन मानता है।