ईरान और यूएई के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। ईरान ने अमेरिका के साथ यूएई की बढ़ती नजदीकियों और सैन्य सहयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। ईरान का कहना है कि यूएई को अमेरिका के साथ मिलकर किए गए हमलों की जिम्मेदारी लेनी होगी और इसका जवाब देना होगा।
ईरान के डिप्टी फॉरेन मिनिस्टर Kazem Gharibabadi ने कहा कि UAE को अमेरिका की सैन्य आक्रामकता में अपनी भूमिका के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। यह विवाद तब शुरू हुआ जब अमेरिकी कॉमर्स डिपार्टमेंट ने 10 जुलाई 2026 को एक दस्तावेज जारी किया। इस डॉक्यूमेंट में UAE के ट्रेड स्टेटस को बेहतर बनाया गया और एक्सपोर्ट कंट्रोल नियमों में ढील दी गई। अमेरिका ने इस फैसले के लिए UAE द्वारा ईरान के खिलाफ युद्ध में दिए गए सहयोग का जिक्र किया।
Gharibabadi ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस डॉक्यूमेंट को एक शर्मनाक दस्तावेज बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि इस वजह से UAE पर अब अंतरराष्ट्रीय कानूनी जिम्मेदारियां आएंगी। वहीं, ईरान की संसद की नेशनल सिक्योरिटी कमेटी के सदस्य Esmail Kousari ने भी साफ शब्दों में कहा कि अमेरिका के साथ सहयोग करने की कीमत UAE को चुकानी होगी।
दूसरी तरफ, UAE के राजदूत Yousef Al Otaiba ने अमेरिका के इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला तकनीक, सुरक्षा, व्यापार और निवेश में दोनों देशों के पुराने और गहरे रिश्तों को और मजबूत करेगा।
अमेरिका ने UAE को Major Defense Partner का दर्जा दिया है। इस वजह से UAE को अब AI चिप्स, सैन्य उपकरण और कमर्शियल सैटेलाइट जैसी आधुनिक तकनीकों तक आसान पहुंच मिलेगी और लाइसेंस की जरूरत भी कम होगी। हालांकि, अमेरिकी सीनेटर Elizabeth Warren ने इस फैसले की आलोचना की है। उनका आरोप है कि ट्रंप सरकार उन अमीराती कारोबारियों को फायदा पहुंचा रही है जिनके राष्ट्रपति के साथ करीबी वित्तीय संबंध हैं।
ऐसी खबरें भी आई हैं कि UAE ने ईरान के इलाकों में कई हवाई हमले किए हैं। तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi शनिवार को ओमान जा रहे हैं। वहां वे Strait of Hormuz और क्षेत्र के अन्य जरूरी मुद्दों पर बातचीत करेंगे।
