ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि वह लेबनान में युद्ध रोकने के अपने वादे को पूरा करे। ईरान के विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि वॉशिंगटन ने इस मुद्दे पर सीधा वादा किया था और अब उसे निभाना होगा। यह मामला अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी चर्चा में है।

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ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने 30 जून 2026 को बताया कि अमेरिका लेबनान में लड़ाई खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वॉशिंगटन की यह जिम्मेदारी है कि वह अपने इस डिप्लोमैटिक वादे पर कायम रहे और इसे लागू करे।

समझौते की शर्तों पर जोर

इससे पहले 29 जून को प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने 18 जून 2026 को हुए एक समझौते (MoU) का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका इसराइल को लेबनान में सभी सैन्य हमले रोकने और वहां से अपनी सेना हटाने के लिए मजबूर करे। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी 28 जून को साफ किया कि तेहरान और वॉशिंगटन के बीच हुए समझौते के मुताबिक पूरे इलाके में लड़ाई बंद होनी चाहिए। ईरान ने यह भी आरोप लगाया कि हालिया अमेरिकी हमलों से पता चलता है कि वॉशिंगटन अपने वादों को गंभीरता से नहीं ले रहा है।

क्या था फ्रेमवर्क एग्रीमेंट

26 जून 2026 को अमेरिका, इसराइल और लेबनान ने वॉशिंगटन में एक फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर साइन किए थे। इसका मुख्य मकसद बॉर्डर पर चल रही जंग को खत्म करना और लेबनान की संप्रभुता को वापस लाना था। इस समझौते के तहत लेबनान ने अपनी सेना के नियंत्रण में सभी गैर-सरकारी सशस्त्र समूहों के हथियार जमा कराने की बात कही थी, जिसमें अमेरिका लेबनानी सेना की मदद करेगा।

मौजूदा हालात और विवाद

संयुक्त राष्ट्र ने इस समझौते को स्थिरता की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है। हालांकि, जमीनी हालात अभी भी तनावपूर्ण हैं। इसराइल के रक्षा मंत्री यिसराएल काट्ज़ ने संकेत दिए हैं कि जब तक हिजबुल्लाह के हथियार जमा नहीं हो जाते, तब तक दक्षिणी लेबनान से और सेना नहीं हटाई जाएगी।

इस पूरे मामले में पाकिस्तान, कतर और ओमान जैसे देशों ने बातचीत कराने में अहम भूमिका निभाई है। कतर में इन विवादों को सुलझाने के लिए फिर से बातचीत शुरू होने की उम्मीद है।