ईरान और अमेरिका के बीच चल रही परमाणु बातचीत को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। एक तरफ जहां अमेरिकी मीडिया और सूत्रों का दावा है कि ईरान अपने समृद्ध यूरेनियम स्टॉक को सौंपने के लिए तैयार हो गया है, वहीं दूसरी तरफ ईरानी अधिकारियों ने इस खबर को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के बड़े सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने अपना यूरेनियम स्टॉक किसी भी देश को सौंपने पर कोई सहमति नहीं दी है और यह मुद्दा अभी शुरुआती बातचीत का हिस्सा ही नहीं था।

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ईरान का इस पूरे मामले पर क्या रुख है?

ईरान के वरिष्ठ सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, देश का परमाणु कार्यक्रम अभी शुरुआती समझौते का हिस्सा नहीं है। इस मुद्दे पर अंतिम समझौते के दौरान ही बात की जाएगी। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम ने भी रिपोर्ट दी है कि ईरान ने इस स्तर पर परमाणु क्षेत्र में कोई भी कदम उठाने की बात नहीं मानी है। इसके अलावा, ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला मुजतबा खामेनेई ने भी एक निर्देश जारी कर साफ कर दिया है कि देश के यूरेनियम स्टॉक को किसी भी कीमत पर बाहर नहीं भेजा जाएगा, जिससे इस मामले में ईरान का रुख काफी कड़ा हो गया है।

अमेरिका और अन्य मीडिया रिपोर्ट्स में क्या दावे किए जा रहे हैं?

दूसरी ओर, अमेरिकी अधिकारियों और द न्यूयॉर्क टाइम्स की कई मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है कि ईरान अपने यूरेनियम स्टॉक को हटाने के लिए सैद्धांतिक रूप से सहमत हो गया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी संकेत दिए थे कि एक बड़ा समझौता लगभग तय हो चुका है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि ईरान पर अमेरिका की तरफ से सैन्य कार्रवाई और बंकर बस्टर स्ट्राइक का भारी दबाव था, जिसके बाद वह इस समझौते के लिए आगे आया था। इस पूरी बातचीत में कतर और पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं।

इस प्रस्तावित समझौते में और क्या शर्तें शामिल हैं?

तनाव कम करने के लिए जो व्यापक ढांचा तैयार किया जा रहा है, उसमें कई अन्य महत्वपूर्ण बातें भी शामिल हैं जो इस क्षेत्र के लिए बड़ी राहत बन सकती हैं:

  • इस समझौते के तहत 60 दिनों के लिए सीजफायर बढ़ाया जा सकता है।
  • हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दोबारा पूरी तरह से सुरक्षित और चालू किया जाएगा।
  • ईरान के बंदरगाहों से अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी हटाई जा सकती है ताकि व्यापार आसान हो सके।
  • ईरान को तेल बेचने की अनुमति देने के लिए प्रतिबंधों में ढील मिल सकती है और विदेशों में फ्रीज किए गए उसके 25 अरब डॉलर के फंड को भी जारी किया जा सकता है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

क्या ईरान अपना यूरेनियम स्टॉक सौंपने के लिए राजी हो गया है?

ईरानी सूत्रों ने इस दावे को पूरी तरह खारिज किया है और कहा है कि परमाणु मुद्दा शुरुआती समझौते का हिस्सा नहीं था, जबकि अमेरिकी रिपोर्ट्स में इसके विपरीत दावा किया जा रहा है।

इस समझौते में कौन से देश मध्यस्थता कर रहे हैं?

इस पूरे मामले में और अमेरिका-ईरान के बीच चल रही बातचीत को सफल बनाने में पाकिस्तान और कतर मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं।

समझौते से ईरान को क्या आर्थिक लाभ हो सकता है?

अगर यह समझौता सफल होता है, तो ईरान पर लगे कुछ प्रतिबंधों में ढील मिलेगी और विदेशों में जमे उसके 25 अरब डॉलर के फंड को वापस जारी किया जा सकता है।