ईरान का बड़ा फैसला, क्षतिग्रस्त परमाणु संयंत्रों का दौरा नहीं कर पाएंगे IAEA प्रमुख रफेल ग्रोसी

Sushma Kumari13 July 20261 min read2 viewsWorld

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने 13 जुलाई 2026 को यह साफ कर दिया है कि देश के क्षतिग्रस्त परमाणु संयंत्रों में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख रफेल ग्रोसी को जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। तेहरान ने उन परमाणु ठिकानों का दौरा करने से मना किया है जो कथित तौर पर युद्ध के दौरान क्षतिग्रस्त हुए थे। यह फैसला ईरान और अंतरराष्ट्रीय निगरानी संस्थाओं के बीच बढ़ते तनाव को और अधिक स्पष्ट करता है।

परमाणु ठिकानों पर सुरक्षा और जांच का संकट

IAEA प्रमुख रफेल ग्रोसी ने पहले ही चेतावनी दी थी कि फरवरी 2026 के बाद से ईरान के परमाणु संयंत्रों की निगरानी में काफी कमी आई है। इसमें फोर्डो, नतांज और इस्फ़हान जैसे महत्वपूर्ण ठिकाने शामिल हैं, जिन्हें अमेरिकी और इजरायली हमलों में नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई थीं। संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी रोज़मेरी डिकार्लो ने भी सुरक्षा परिषद को इन ठिकानों की निगरानी में आ रही मुश्किलों के बारे में सूचित किया था।

ईरान का नया तर्क और शर्तें

तेहरान का कहना है कि संसद के नए कानून के अनुसार, IAEA के इंस्पेक्टर केवल बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र और तेहरान रिसर्च रिएक्टर तक ही सीमित रहेंगे। ईरान के अनुसार, 18 अक्टूबर 2025 को रेजोल्यूशन 2231 की अवधि समाप्त हो गई है, इसलिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पास अब उनके परमाणु कार्यक्रम को लेकर कोई कानूनी अधिकार नहीं है। ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि क्षतिग्रस्त साइटों तक पहुंच तभी संभव होगी जब अमेरिका के साथ अंतिम समझौता हो और उन पर लगे प्रतिबंध हटाए जाएं।

Share:

Comments

Leave a comment