ईरान और अमेरिका के बीच जमे हुए पैसों को लेकर बड़ी खींचतान चल रही है। ईरान के सेंट्रल बैंक के गवर्नर ने साफ कर दिया है कि उन्हें अमेरिका से सामान खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। यह मामला तब गरमाया जब डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान को अपने फंड का इस्तेमाल सिर्फ अमेरिकी किसानों के उत्पादों के लिए करना होगा।

23 जून 2026 को सेंट्रल बैंक के गवर्नर Abdolnaser Hemmati ने बताया कि साइन किए गए समझौतों में ऐसी कोई शर्त नहीं है कि ईरान को अपने पैसे सिर्फ अमेरिकी सामान पर खर्च करने होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि हालांकि शुरुआती फंड का इस्तेमाल ज़रूरी सामान और दवाइयों के लिए होगा, लेकिन बाकी रकम का इस्तेमाल ईरान अपनी मर्ज़ी से करेगा।

ईरान ने खारिज किए अमेरिकी सुझाव

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने भी अमेरिकी सुझावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि ईरान अपनी संपत्ति का इस्तेमाल पूरी आज़ादी के साथ करेगा। अधिकारियों ने साफ किया कि वे अमेरिकी कृषि उत्पाद तभी खरीदेंगे जब उनकी कीमत कम होगी और क्वालिटी दूसरे देशों के मुकाबले बेहतर होगी।

दूसरी तरफ, डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया था कि यह पैसा केवल अमेरिका से मक्का, गेहूं और सोयाबीन जैसे सामान खरीदने के लिए इस्तेमाल होगा। इसी तरह जेडी वैन्स ने 22 जून 2026 को सुझाव दिया था कि इस पैसे पर अमेरिका और कतर की निगरानी रहेगी और इसे अमेरिकी कृषि उत्पादों पर खर्च किया जा सकता है।

फंड रिलीज़ और समझौते की शर्तें

दोनों देशों के बीच कुल 12 बिलियन डॉलर के जमे हुए फंड को रिलीज़ करने का समझौता हुआ है। यह पैसा दो बराबर किस्तों में दिया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया के लिए कतर और स्विट्जरलैंड में बातचीत हुई है। समझौते के तहत वॉशिंगटन ने 60 दिनों के लिए ईरान पर से कुछ प्रतिबंध हटाए हैं, जिससे ईरान अपना तेल बेच सकेगा और उसका भुगतान ले सकेगा।

सेंट्रल बैंक के गवर्नर ने यह भी बताया कि इस फंड पर पूरा अधिकार ईरान के सेंट्रल बैंक (CBI) का है। समझौते के आर्टिकल 11 के मुताबिक, अमेरिका इन फंड्स को उपलब्ध कराएगा और इनके इस्तेमाल का तरीका आपसी बातचीत से तय किया जाएगा।

विवरण जानकारी
कुल रिलीज़ फंड 12 बिलियन डॉलर
किस्तों की संख्या 2 (6-6 बिलियन डॉलर)
उपयोग का उद्देश्य दवाइयाँ और ज़रूरी सामान
प्रतिबंध छूट अवधि 60 दिन (तेल बिक्री के लिए)
मुख्य समझौता नियम आर्टिकल 11