अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते को लेकर पिछले कुछ दिनों से दुनिया भर में बड़ी चर्चा थी। खबर थी कि रविवार को जेनेवा में दोनों देश एक फाइनल एग्रीमेंट पर साइन करेंगे, लेकिन अब ईरान ने इन सभी दावों को पूरी तरह गलत बताया है। इस खबर के आने और फिर उसके खंडन से अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी काफी उथल-पुथल मची रही।

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ईरान ने खबरों को बताया झूठ

ईरान के आधिकारिक सूत्रों और Fars News Agency ने शुक्रवार, 12 जून 2026 को यह साफ कर दिया कि रविवार को जेनेवा में किसी भी समझौते पर हस्ताक्षर होने की खबर पूरी तरह गलत है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने भी इस बात की पुष्टि की कि ऐसा कोई समझौता तय नहीं हुआ है। ईरान सरकार का कहना है कि अभी अंदरूनी तौर पर फैसलों की प्रक्रिया चल रही है और कोई भी फाइनल डील तैयार नहीं हुई है, इसलिए साइन होने का सवाल ही नहीं उठता।

अमेरिका के दावों और ईरान की सच्चाई

यह घटना इसलिए चर्चा में आई क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और कई विदेशी मीडिया चैनलों ने संकेत दिया था कि एक बड़ा समझौता होने वाला है। खबरों के मुताबिक, US Air Force के विमान जेनेवा में सामान पहुंचा रहे थे ताकि उपराष्ट्रपति JD Vance की मौजूदगी में साइनिंग सेरेमनी की जा सके। हालांकि, ईरान के जवाब ने अमेरिका के इन दावों की पोल खोल दी है।

क्या था इस संभावित समझौते में

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस समझौते या MOU में कुछ मुख्य बातें शामिल थीं, जैसे कि अमेरिका द्वारा ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाना, ईरान के फंसे हुए पैसों को वापस करना और लेबनान में चल रहे संघर्ष को खत्म करना। साथ ही यह भी कहा गया था कि ईरान Strait of Hormuz को दोबारा खोलने पर सहमत हो सकता है। लेकिन ईरान ने हमेशा की तरह यह साफ कर दिया है कि वह Strait of Hormuz पर अपना नियंत्रण नहीं छोड़ेगा।

बाजार और क्षेत्र पर असर

12 जून को जब शांति समझौते की खबरें आईं, तो अमेरिकी शेयर बाजार (Stock Futures) में बड़ी तेजी देखी गई क्योंकि निवेशकों को उम्मीद थी कि तनाव कम होगा। लेकिन जैसे ही ईरान ने इन खबरों का खंडन किया, बाजार का यह उत्साह कम हो गया। इस पूरी बातचीत में Qatar और Oman जैसे देशों ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी। फिलहाल इस क्षेत्र में तनाव बना हुआ है और ड्रोन हमलों व अमेरिकी नाकाबंदी की खबरें भी सामने आ रही हैं।