ईरान इस समय अमेरिका और इसराइल के हमलों के बाद मलबे के ढेर में बदला हुआ है। कई महीनों तक चले इन हमलों ने देश के बुनियादी ढांचे को पूरी तरह तबाह कर दिया है। अब ईरान के सामने सबसे बड़ी चुनौती करोड़ों लोगों के घर, अस्पताल और सरकारी इमारतों को फिर से खड़ा करने की है, जिसमें भारी भरकम खर्च आने वाला है।
शहरों में तबाही और बुनियादी ढांचे का नुकसान
रिपोर्ट के मुताबिक, 28 फरवरी से 7 अप्रैल 2026 के बीच अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर लगातार हवाई हमले किए। इन हमलों में पुल, बंदरगाह, रेलवे लाइन, यूनिवर्सिटी और बिजली घरों को निशाना बनाया गया। करज का बीवान ब्रिज भी इसमें शामिल था। इसके अलावा, जून 2025 में फोर्डो, नतान्ज और इस्फहान में स्थित परमाणु केंद्रों को भी भारी नुकसान पहुँचाया गया। केवल तेहरान प्रांत में ही 60,000 से ज्यादा घर और दुकानें पूरी तरह तबाह हो गई हैं।
भारी संख्या में जान-माल का नुकसान
इन सैन्य हमलों ने आम लोगों की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित किया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 28 फरवरी से 7 अप्रैल के बीच 2,362 आम नागरिक मारे गए, जिनमें 383 बच्चे शामिल थे। वहीं 32,314 से ज्यादा लोग घायल हुए। एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक लड़कियों के स्कूल पर मिसाइल हमले में 170 लोगों की मौत हुई। कुल मिलाकर इस जंग में ईरान ने 3,375 से ज्यादा लोगों को खोया है।
आर्थिक चोट और पुनर्निर्माण का खर्च
ईरान को इस युद्ध की वजह से बहुत बड़ा आर्थिक झटका लगा है। बुनियादी ढांचे को फिर से बनाने के लिए अरबों डॉलर की जरूरत है। आर्थिक नुकसान का ब्यौरा नीचे दी गई टेबल में देखा जा सकता है:
| विवरण | अनुमानित लागत/नुकसान |
|---|---|
| कुल प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नुकसान | 270 अरब डॉलर |
| बुनियादी ढांचे का न्यूनतम नुकसान | 80 अरब डॉलर |
| बुनियादी ढांचे का अधिकतम नुकसान (संभावित) | 350 अरब डॉलर |
| प्रस्तावित पुनर्निर्माण फंड (चर्चा के अनुसार) | 300 अरब डॉलर |
| एक बड़े पुल को बनाने का खर्च | 23 मिलियन डॉलर |
| पेंटागन द्वारा युद्ध खर्च की मांग | 80 अरब डॉलर |
सरकारी बयान और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों से ईरान हार नहीं मानेगा और देश इसे दोबारा बनाने की क्षमता रखता है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर दोबारा हमला हुआ तो ईरान कड़ा जवाब देगा। दूसरी तरफ, संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों और मानवाधिकार commissioner वोल्कर तुर्क ने इन हमलों की कड़ी निंदा की और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया। तेहरान के डिप्टी गवर्नर सैयद कमलेउद्दीन मीरजाफरियन ने जानकारी दी कि तेहरान के लगभग 80 प्रतिशत प्रभावित इलाकों को ठीक कर लिया गया है।
