ईरान और NATO के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। ईरान ने NATO के उन दावों को पूरी तरह गलत बताया है जिनमें उसके परमाणु कार्यक्रम और Strait of Hormuz के बारे में बात की गई थी। यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब अंकारा में NATO की बैठक हुई और वहां ईरान को लेकर सख्त बातें कही गईं।
9 जुलाई 2026 को IRNA न्यूज़ एजेंसी और तुर्की में ईरानी दूतावास ने NATO के दावों को बेबुनियाद बताया। इससे पहले 8 जुलाई को अंकारा में 36वें NATO शिखर सम्मेलन में गठबंधन के नेताओं ने कहा था कि ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए। साथ ही उन्होंने ईरान से Strait of Hormuz में जहाजों के आने-जाने की आजादी का सम्मान करने को कहा था।
तनाव के बीच ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने 9 जुलाई को चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने जहाजों के रास्तों में दखल दिया तो इसका जवाब बहुत कड़ा होगा। एक सुरक्षा सूत्र ने 8 जुलाई को यह भी धमकी दी थी कि अगर ईरान की जमीन पर हमले फिर से शुरू हुए तो वह Strait of Hormuz को पूरी तरह बंद कर देगा और दुश्मन के ठिकानों पर दोगुने हमले करेगा।
यह खींचतान तब तेज हुई जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने 8 जुलाई को कहा कि ईरान के साथ जो अस्थाई युद्धविराम था वह अब खत्म हो गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान ने जहाजों पर हमला जारी रखा तो अमेरिका फिर से हमले करेगा। बताया गया है कि 6 और 7 जुलाई के बीच अमेरिका ने ईरान पर शक्तिशाली हमले किए थे क्योंकि आरोप था कि ईरान ने व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया था।
वहीं ईरान के विदेश मंत्री Abbas Aragchi ने 9 जुलाई को पाकिस्तान के सेना प्रमुख से फोन पर बात की और अमेरिकी हमलों की निंदा की। उन्होंने साफ किया कि ईरान अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है।
