अमेरिका के नए प्रतिबंधों को ईरान ने नकारा, ट्रंप के इकोनॉमिक डी-डे ऐलान के बाद दोनों देशों में तनाव बढ़ा

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर से बहुत ज्यादा बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा नए आर्थिक प्रतिबंधों का ऐलान करने के बाद ईरान ने इसे पूरी तरह से खारिज कर दिया है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी Tasnim ने साफ कहा है कि अमेरिका की यह पुरानी नीति है जो पहले भी फेल हो चुकी है और इस बार भी इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।
क्या है अमेरिका का नया प्लान
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने 19 अगस्त 2026 को एक बड़ा ऐलान किया था जिसे उन्होंने ECONOMIC D-DAY नाम दिया। उनका कहना था कि यह किसी भी देश के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा और असरदार आर्थिक कदम है। इसके जरिए ईरान के पैसे आने के सभी रास्तों को बंद करने की योजना है। इसमें तेल की तस्करी, करेंसी एक्सचेंज, पैसे भेजने के तरीके, जहाजों के रजिस्ट्रेशन और फर्जी कंपनियों को निशाना बनाया जा रहा है। अमेरिका ने यह भी चेतावनी दी है कि जो भी देश या कंपनी ईरान की मदद करेगी, उसे बहुत भारी आर्थिक परिणाम भुगतने होंगे। इससे पहले अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने 13 अगस्त 2026 को ही कह दिया था कि ईरान पर दबाव बनाने के लिए बहुत बड़े कदम उठाए जाएंगे।
डिप्लोमैटिक बातचीत हुई बंद और होर्मुज स्ट्रेट पर संकट
दोनों देशों के बीच बातचीत का जो रास्ता खुला था, वह भी अब बंद हो चुका है। अमेरिका और ईरान के बीच जो 60 दिनों का समझौता था, उसकी समयसीमा 17 अगस्त 2026 को खत्म हो गई। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने 18 अगस्त को बताया कि अमेरिकी उल्लंघनों की वजह से अब इस डेडलाइन का कोई मतलब नहीं बचा है। इसके बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के साथ हर तरह की कूटनीतिक बातचीत को रोक दिया। अमेरिकी नौसेना ने होर्मुज स्ट्रेट पर पहले से ही नाकाबंदी कर रखी है जिसे राष्ट्रपति ट्रंप ने अभी भी पूरी तरह से लागू रखने को कहा है।
ईरान का कड़ा रुख
अमेरिका की इस सख्ती के जवाब में ईरानी संसद के स्पीकर Mohammad-Bagher Ghalibaf ने दो टूक कहा है कि जब तक अमेरिका अपनी नौसेना की नाकाबंदी नहीं हटाता, सारे प्रतिबंध वापस नहीं लेता, ईरान का फंसा हुआ पैसा नहीं छोड़ता और सैन्य कार्रवाई बंद नहीं करता, तब तक होर्मुज स्ट्रेट बंद ही रहेगा। सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के अधिकारियों जैसे Mohebbi और Mohammad Bagher Zolghadr ने भी यही बात दोहराई है। हालांकि कुछ जानकारों का मानना है कि अकेले प्रतिबंधों से ईरान की सरकार को गिराना मुश्किल है, फिर भी अमेरिकी प्रशासन ईरान के कच्चे तेल और पेट्रोकेमिकल व्यापार को रोकने के लिए अपने नियमों को बहुत सख्ती से लागू कर रहा है।