ईरान की वजह से दुनिया के बाज़ारों में भारी हलचल मची हुई है। संयुक्त राष्ट्र (UN) के सदस्य देशों ने चेतावनी दी है कि ईरान की हरकतों से एनर्जी मार्केट और सप्लाई चेन खराब हो रही है। इससे न सिर्फ तेल की कीमतों पर असर पड़ रहा है, बल्कि पूरी दुनिया के खाने-पीने के सामान की सप्लाई भी खतरे में पड़ गई है।

ईरान की वजह से दुनिया पर क्या असर पड़ेगा?

जर्मनी के विदेश मंत्री Johann Wadephul ने कहा कि ईरान फारस की खाड़ी (Persian Gulf) में ग्लोबल इकोनॉमी पर हमला कर रहा है। उन्होंने बताया कि Strait of Hormuz में रास्ता रोकने से दुनिया भर में एनर्जी और खाद की कमी हो सकती है। अगर खाद की सप्लाई नहीं होगी, तो दुनिया में अनाज की कमी हो जाएगी जिससे भुखमरी बढ़ सकती है। ब्रिटेन ने भी UN सुरक्षा परिषद की मीटिंग में कहा कि किसी भी देश को दुनिया की अर्थव्यवस्था को बंधक बनाने की इजाजत नहीं होनी चाहिए। ब्रिटेन के अनुमान के मुताबिक, इस स्थिति की वजह से जून तक करीब 4.5 करोड़ लोग गंभीर भुखमरी की चपेट में आ सकते हैं।

UN और अन्य देशों का इस पर क्या कहना है?

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव António Guterres ने चेतावनी दी कि दुनिया एक बड़े युद्ध की कगार पर खड़ी है। उन्होंने अमेरिका और इसराइल से युद्ध रोकने और ईरान से पड़ोसी देशों पर हमला बंद करने की अपील की। महासचिव ने साफ कहा कि इस जटिल समस्या का कोई सैन्य समाधान नहीं है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने भी अपील की है कि ऐसे कदम न उठाए जाएं जिससे ऊर्जा का प्रवाह रुके, क्योंकि इससे गरीब देशों पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है।

ईरान का पक्ष और अभी की स्थिति क्या है?

इन तमाम आरोपों पर ईरान के UN राजदूत ने कहा कि ईरान ने हमेशा समुद्री सुरक्षा और नेविगेशन की आजादी का सम्मान किया है। ईरान का दावा है कि Strait of Hormuz में तनाव पैदा करने और अस्थिरता फैलाने की पूरी जिम्मेदारी अमेरिका और इसराइल की है। 23 अप्रैल 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच एक अस्थायी युद्धविराम (ceasefire) हुआ था, लेकिन इसके बावजूद समुद्र में जहाजों को रोकने और उन पर हमला करने की खबरें आ रही हैं। जर्मनी अब UN सुरक्षा परिषद से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग करेगा।