ईरान और अमेरिका के बीच हुआ शांति समझौता टूट गया है। ईरान ने एक बार फिर अपनी हरकत से दुनिया को चौंकाया और एक ऑयल टैंकर पर हमला कर दिया। इस हमले के बाद अब इलाके में तनाव काफी बढ़ गया है और अमेरिका ने भी जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है।
घटना 27 जून 2026 की है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि सुबह करीब 4:30 बजे ईरान ने Panama के झंडे वाले ऑयल टैंकर M/T Kiku पर एक तरफा हमला करने वाले ड्रोन से हमला किया। यह हमला Strait of Hormuz के पास हुआ। इस हमले की वजह से टैंकर के ब्रिज को नुकसान पहुंचा है, लेकिन राहत की बात यह है कि जहाज पर सवार सभी क्रू मेंबर्स सुरक्षित हैं।
अमेरिका ने जताई कड़ी नाराजगी
CENTCOM ने साफ कहा कि Kiko टैंकर पर हमला ceasefire agreement की शर्तों का सीधा उल्लंघन है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस हमले को एक मूर्खतापूर्ण उल्लंघन बताया। वहीं उपराष्ट्रपति JD Vance ने चेतावनी देते हुए कहा कि हिंसा का जवाब हिंसा से ही दिया जाएगा। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक ईरान की यह हरकत कमर्शियल जहाजों के खिलाफ बेवजह का हमला है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार के रास्ते को खतरा पैदा हुआ है।
क्या था शांति समझौता
बता दें कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने 17 जून 2026 को एक समझौता (MOU) साइन किया था। इस समझौते का मकसद आपसी लड़ाई को खत्म करना और अगले 60 दिनों तक Strait of Hormuz को व्यापारिक जहाजों के लिए सुरक्षित और खुला रखना था।
अमेरिका ने किया पलटवार
यह हमला 25 जून को सिंगापुर के जहाज M/V Ever Lovely पर हुए ड्रोन हमले के बाद हुआ है। इसके जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरान के कई मिलिट्री ठिकानों पर जोरदार हमले किए। इन हमलों में ईरान के सर्विलांस सिस्टम, एयर डिफेंस साइट और ड्रोन स्टोरेज सेंटर को निशाना बनाया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक Qeshm Island और Sirik में बड़े धमाके हुए हैं।
ईरान का अपना दावा
दूसरी तरफ ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का कहना है कि उन्होंने सिर्फ उन जहाजों पर चेतावनी के शॉट दागे थे जो गलत रास्तों का इस्तेमाल कर रहे थे। ईरान के विदेश मंत्रालय ने उल्टा अमेरिका पर ही शांति समझौता तोड़ने का आरोप लगाया है। वहीं ईरानी संसदीय अधिकारी इब्राहिम अजीजी ने कहा कि जब बातचीत चल रही थी, तब वॉशिंगटन ने हमला किया।
जहाजों और नाविकों के लिए बढ़ा खतरा
इस बढ़ते तनाव की वजह से अब समुद्र में फंसे जहाजों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। यूनाइटेड नेशंस की इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) ने फारस की खाड़ी में फंसे सैकड़ों जहाजों और हजारों नाविकों को निकालने का काम फिलहाल रोक दिया है। जॉइंट मैरीटाइम इंफॉर्मेशन सेंटर ने भी सुरक्षा खतरे का लेवल बढ़ा दिया है।
