इराक के एरबिल इलाके में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। यहाँ एक ईरानी कुर्द विरोधी संगठन के कैंप पर ड्रोन हमला किया गया है। सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, हमले में कैंप के हथियार डिपो को निशाना बनाया गया। घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और जांच एजेंसियां हमले के पीछे के लोगों का पता लगा रही हैं।

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एरबिल में ड्रोन हमले और नुकसान की जानकारी

उत्तरी इराक का एरबिल क्षेत्र पिछले कुछ समय से ड्रोन हमलों का केंद्र बना हुआ है। यहाँ कुर्द विपक्षी समूहों की काफी सक्रियता रहती है। हालिया घटनाओं की बात करें तो:

  • 1 मई 2026: ईरानी शाहेद ड्रोन से हमले में कुर्द फोर्स का मुख्यालय पूरी तरह तबाह हो गया।
  • 24 अप्रैल 2026: कुर्दिश फोर्स के मुख्यालय पर एक और ड्रोन हमला हुआ।
  • 22 अप्रैल 2026: एक हमले में कुर्दिश लिबरेशन पार्टी के तीन लड़ाके घायल हो गए।
  • 29 मार्च 2026: ईरान समर्थित समूहों ने अमेरिकी दूतावास और राष्ट्रपति नेचिरवान बरजानी के आवास को निशाना बनाया।

इन हमलों में कौन-कौन शामिल है

इन हमलों के पीछे मुख्य रूप से ईरान और उसकी रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) का हाथ माना जाता है। ईरान का आरोप है कि कुर्द समूह इराक की जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ साजिश रचने के लिए करते हैं। इसके अलावा सरया औलिया अल-दम और कतईब हिजबुल्लाह जैसे ईरान समर्थित मिलिशिया समूहों ने भी इन हमलों में अपनी भूमिका निभाई है। वहीं, अमेरिका इन कुर्द लड़ाकों को समर्थन देता है और एरबिल में अमेरिकी सैन्य ठिकाने भी हमलों का लक्ष्य रहे हैं।

सरकार और अधिकारियों का आधिकारिक बयान

इराकी और कुर्दिश अधिकारियों ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता का सीधा उल्लंघन बताया है। कुर्दिस्तान क्षेत्रीय सरकार ने चेतावनी दी है कि इराक की जमीन को जंग का मैदान नहीं बनने दिया जाएगा। दूसरी तरफ, अमेरिकी अधिकारियों ने इन घटनाओं को घृणित आतंकी हमले करार दिया है। इराकी संघीय अधिकारी स्थिति को संभालने के लिए क्षेत्रीय अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।

Frequently Asked Questions (FAQs)

एरबिल में ड्रोन हमले कब हुए

मार्च और अप्रैल 2026 के अंत से लेकर 1 मई 2026 तक एरबिल में कई ड्रोन हमले हुए, जिनमें सबसे बड़ा हमला 1 मई को शाहेद ड्रोन के जरिए किया गया।

हमलों के लिए किसे जिम्मेदार माना जा रहा है

इन हमलों के लिए ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) और ईरान समर्थित मिलिशिया समूहों जैसे कतईब हिजबुल्लाह को जिम्मेदार माना गया है।