ईरान और अमेरिका-इजरायल गठबंधन के बीच चल रही जंग अब और तेज हो गई है। शनिवार, 3 अप्रैल 2026 को ईरान की सेना ने UAE और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर Arash-2 ड्रोन से ताज़ा हमले किए। इस हमले में मुख्य रूप से रडार सिस्टम, रिफाइनरी और एल्युमीनियम इंडस्ट्री को निशाना बनाया गया है। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों के लिए सुरक्षा एक बड़ी चिंता बन गई है क्योंकि ड्रोन के टुकड़े रिहायशी इलाकों में भी गिर रहे हैं।

हमले में किन ठिकानों को बनाया गया निशाना?

ईरान की सेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने आधिकारिक बयान में बताया कि उन्होंने UAE के Al-Dhafra एयर बेस और कुवैत के Ali Al Salem एयर बेस पर हमला किया। ईरान का दावा है कि UAE की एल्युमीनियम इंडस्ट्री में अमेरिका और इजरायल का बड़ा पैसा लगा है और वहां तैयार सामान का इस्तेमाल F-35 जैसे लड़ाकू विमानों में होता है। कुवैत में अमेरिकी सेना के कमांड हेडक्वार्टर और हेलिकॉप्टर यूनिट्स को भी निशाना बनाने की कोशिश की गई। प्रवासियों के लिए राहत की बात यह है कि सेना हर खतरे को रोकने के लिए हाई अलर्ट पर है।

डिफेंस सिस्टम की कार्रवाई और नुकसान का विवरण

UAE और कुवैत के रक्षा मंत्रालयों ने बताया कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने ईरान की तरफ से आए कई ड्रोन और मिसाइलों को हवा में ही तबाह कर दिया। हालांकि, कुवैत की Mina Al Ahmadi रिफाइनरी और एक पानी के प्लांट में मलबे की वजह से नुकसान हुआ है। बहरीन में भी ड्रोन का मलबा गिरने से 4 लोग घायल हुए हैं और कुछ घरों को नुकसान पहुँचा है। अमेरिका के अधिकारियों ने बताया कि उनके कुछ विमानों को भी क्षति हुई है और एक पायलट की तलाश जारी है। नीचे दी गई टेबल में पिछले 24 घंटों की कार्रवाई का विवरण है:

देश का नाम हवा में गिराए गए ड्रोन इंटरसेप्ट की गई मिसाइलें
UAE 47 22
कुवैत 26 9

ईरान ने पहले ही चेतावनी दी थी कि जो भी देश अपनी ज़मीन या आसमान का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ हमले के लिए देगा, वह उनके निशाने पर रहेगा। फिलहाल खाड़ी देशों की स्थिति तनावपूर्ण है और सुरक्षा एजेंसियां कड़ी निगरानी रख रही हैं।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.