मध्य पूर्व में हालात काफी तनावपूर्ण हो गए हैं। 3 अप्रैल 2026 को ईरान की सेना ने जॉर्डन, कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला करने का दावा किया है। इस घटना से खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों और स्थानीय नागरिकों में सुरक्षा को लेकर चिंता देखी जा रही है। कुवैत में इन हमलों की वजह से बिजली और पानी की सप्लाई जैसे जरूरी संसाधनों पर भी बुरा असर पड़ा है।

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कुवैत और बहरीन में इन हमलों से कितना नुकसान हुआ है?

कुवैत के बिजली और जल मंत्रालय के अनुसार, ईरान के इस हमले से एक बड़े पावर प्लांट और पानी को साफ करने वाले संयंत्र को काफी नुकसान पहुँचा है। वहां की एक तेल रिफाइनरी में भी आग लगने की खबर मिली है जिससे कामकाज प्रभावित हुआ है। बहरीन की सेना ने जानकारी दी है कि उन्होंने अब तक लगभग 188 बैलिस्टिक मिसाइलें और 445 ड्रोन को हवा में ही मार गिराया है। इन हमलों की वजह से वहां की इमारतों और निजी संपत्तियों को बड़ा खतरा पैदा हो गया है और सेना ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है।

ईरान ने इन हमलों के पीछे क्या वजह बताई है?

ईरान की तासनिम न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक, ये हमले अमेरिका द्वारा ईरान के औद्योगिक क्षेत्रों पर किए गए हमलों का बदला लेने के लिए किए गए हैं। ईरान ने यह भी दावा किया है कि उसने ईरान की सीमा के ऊपर उड़ रहे एक अमेरिकी F-15E फाइटर जेट को मार गिराया है और उसके पायलट की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। दूसरी तरफ, अमेरिका, सऊदी अरब, कुवैत और बहरीन सहित कई देशों ने मिलकर एक संयुक्त बयान जारी किया है जिसमें ईरान की इन हरकतों की कड़ी निंदा की गई है और इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बताया गया है।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.