Iran Economic Crisis: अमेरिका की सख्त नाकाबंदी से ईरान की हालत हुई खराब, तेल निर्यात हुआ शून्य.

Sushma Kumari23 August 20263 min read57 viewsWorld
Iran Economic Crisis: अमेरिका की सख्त नाकाबंदी से ईरान की हालत हुई खराब, तेल निर्यात हुआ शून्य.

ईरान इस समय बहुत बड़े आर्थिक संकट से गुजर रहा है क्योंकि अमेरिका की नौसेना ने देश के बंदरगाहों को पूरी तरह से घेर रखा है। यह नाकाबंदी अब अपने छठे महीने में प्रवेश कर चुकी है, जिससे आम जनता से लेकर सरकार तक की मुश्किलें बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं। अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) की तरफ से हॉर्मूज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को लगभग रोक दिया गया है। इस दौरान कई कमर्शियल जहाजों को रास्ता बदला गया और कुछ को रोका या बंद भी किया गया। ईरान ने साफ कह दिया है कि जब तक अमेरिका अपना रुख नहीं बदलता, तब तक इस रास्ते पर सख्ती बनी रहेगी।

अमेरिका का नया आर्थिक प्रहार और ईरान की चेतावनी

अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने सोमवार, 24 अगस्त 2026 को नए आर्थिक प्रतिबंधों की घोषणा करने की बात कही है। अमेरिका इसे इतिहास का सबसे बड़ा और कड़ा आर्थिक अलगाव अभियान मान रहा है। इस स्थिति को देखते हुए ईरानी अधिकारियों ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसेन रजाई ने बयान दिया है कि जो भी देश इस अमेरिकी अभियान में शामिल होगा, उसे दुश्मन माना जाएगा और उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं दूसरी तरफ, विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने इन आने वाले प्रतिबंधों को अमेरिका की घबराहट बताया और कहा कि इससे तेहरान झुकने वाला नहीं है।

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अर्थव्यवस्था में भारी गिरावट और तेल निर्यात पर असर

इस कड़े संकट की वजह से देश की अर्थव्यवस्था बुरी तरह टूट चुकी है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने साल 2026 के लिए ईरान की जीडीपी में 5.4% की गिरावट आने की आशंका जताई है। ईरान के केंद्रीय बैंक के गवर्नर ने यह पुष्टि कर दी है कि देश का तेल निर्यात गिरकर पूरी तरह से शून्य पर आ गया है। अब कच्चे तेल का उत्पादन केवल देश के अंदर की जरूरतों को पूरा करने के लिए ही किया जा रहा है। इन सब के बीच सरकार अपने 93 मिलियन यानी करीब 9 करोड़ 30 लाख नागरिकों के लिए ईंधन की कीमतें बढ़ाने पर विचार कर रही है। राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने बताया कि ईंधन को बनाने में लागत 1.3 मिलियन रियाल प्रति लीटर आती है, जबकि आम जनता को यह केवल 15,000 रियाल में ही मिल रहा है।

ईंधन सब्सिडी और कीमतों में बदलाव की तैयारी

उपराष्ट्रपति मोहम्मदरेजा आरिफ ने यह साफ कर दिया है कि सरकार पर वित्तीय बोझ बहुत ज्यादा बढ़ गया है, इसलिए पेट्रोल की कीमतों में धीरे-धीरे बढ़ोतरी करना मजबूरी बन गया है। मौजूदा समय में देश में रोजाना का घाटा चल रहा है क्योंकि खपत 135 मिलियन लीटर है और उत्पादन सिर्फ 112 मिलियन लीटर ही हो रहा है। स्ट्रैटेजिक एनर्जी पॉलिसी एंड मैनेजमेंट ऑर्गेनाइजेशन के प्रमुख इस्माइल साग़ब-एस्फहानी ने बताया कि अधिकारी पेट्रोल की खपत को नियंत्रित करने के लिए तीन अलग-अलग प्रस्तावों पर विचार कर रहे हैं। इसमें पेट्रोल पंपों पर रोज मिलने वाली सप्लाई की सीमा तय करना, बाजार भाव पर तय कोटे से ज्यादा इस्तेमाल पर सख्ती करना, या फिर सीधे नागरिकों के खातों में ईंधन का कोटा ट्रांसफर करना शामिल है। आने वाले कुछ ही हफ्तों में इस सब्सिडी सुधार पर आखिरी फैसला ले लिया जाएगा।

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