Iran Crisis: अमेरिका और इसराइल के साथ जंग से ईरान में भीषण मंहगाई, आम जनता का जीना हुआ मुश्किल.

अमेरिका और इसराइल के साथ चल रही सैन्य जंग के कारण ईरान के आम लोगों को बहुत ज्यादा आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। यह संघर्ष जो 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था, अब अपने छठे महीने में प्रवेश कर चुका है। इस युद्ध की वजह से ईरान की पूरी अर्थव्यवस्था बहुत बुरी तरह से चरमरा गई है और देश के नागरिकों को रोजमर्रा की जिंदगी गुजारने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
अर्थव्यवस्था की स्थिति और राष्ट्रपति का बयान
ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने 16 अगस्त को यह बात स्वीकार की थी कि देश की अर्थव्यवस्था बहुत खराब स्थिति में पहुंच चुकी है। औद्योगिक बुनियादी ढांचे के नष्ट होने और तेल निर्यात से होने वाली कमाई में भारी गिरावट आने के कारण देश की हालत दयनीय हो गई है। सरकार को अब संघर्ष कर रहे कारखानों को वित्तीय मदद यानी सब्सिडी देनी पड़ रही है, जबकि पहले सरकार इनसे टैक्स वसूल करती थी। जुलाई 2026 में देश का मिजरी इंडेक्स लगभग 96% तक पहुंच गया था।
महंगाई और बेरोजगारी का बुरा हाल
देश में महंगाई ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं और सालाना आधार पर खाने-पीने की चीजों के दाम 66% तक बढ़ गए हैं। रोजमर्रा की जरूरी चीजों के दामों में तो और भी ज्यादा बढ़ोतरी देखने को मिली है, जिसमें कुकिंग ऑयल के दामों में 162% और ब्रेड तथा अनाज के दामों में 122% की भारी तेजी आई है। इसके अलावा बेरोजगारी भी एक बहुत बड़ी समस्या बनी हुई है। साल 2026 के वसंत के मौसम में युवाओं के बीच बेरोजगारी दर 23.4% दर्ज की गई, जिसके कारण बहुत से लोगों को छोटे-मोटे और असुरक्षित काम करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
प्रतिबंध और होर्मुज जलडमरूमध्य का विवाद
यह खराब हालात अमेरिका द्वारा लगाए गए कड़े प्रतिबंधों और होर्मुज जलडमरूमध्य में चल रहे नौका नाकाबंदी के बीच बने हैं। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने इस रणनीति को आर्थिक गुस्सा नाम दिया है। इन तमाम आर्थिक दबावों के बावजूद, ईरान के उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने 15 अगस्त को यह साफ कर दिया कि जब तक अमेरिका अपनी हार स्वीकार नहीं करता, तब तक ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी जारी रखेगा।
दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu इस सैन्य अभियान को ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल खतरों को रोकने के लिए जरूरी बता रहे हैं। लेकिन इस सब के बीच आम जनता पर मानवीय संकट लगातार गहराता जा रहा है। तेहरान के स्थानीय रहवासियों का कहना है कि वहां चारों तरफ निराशा का माहौल है और लोगों के लिए अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करना भी नामुमकिन हो गया है।