ईरान में युद्ध के माहौल ने लोगों को डरा दिया है और अब वहां के बाज़ार में केवल बुनियादी चीज़ों की मांग बढ़ी है। सरकार ने इस संकट से निपटने के लिए आयात पर सब्सिडी देने का फैसला किया है। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि आम जनता को खाने-पीने की चीज़ों के लिए भारी कीमत न चुकानी पड़े और महंगाई काबू में रहे।
सरकार ने सब्सिडी और आयात के लिए क्या योजना बनाई है?
ईरानी सरकार ने दवाइयों और गेहूं जैसे ज़रूरी सामानों पर सब्सिडी देने का ऐलान किया है। इसके लिए सरकार आयात करने वालों को, जिनमें ज़्यादातर शासन के करीबी लोग शामिल हैं, बहुत सस्ती दरों पर डॉलर उपलब्ध कराएगी। इसका मकसद रिटेल कीमतों को कम रखना और महंगाई को काबू में रखना है। हालांकि, आर्थिक जानकारों का कहना है कि इस रणनीति से देश के विदेशी मुद्रा भंडार में तेज़ी से कमी आ सकती है।
क्या अमेरिका की नाकाबंदी का ईरान पर असर हुआ है?
कृषि मंत्री Gholamreza Nouri ने जानकारी दी कि अमेरिकी नाकाबंदी का देश की खाद्य आपूर्ति पर बहुत कम असर पड़ा है। उन्होंने बताया कि करीब 85 प्रतिशत कृषि उत्पाद और बुनियादी सामान देश में ही पैदा होते हैं। ईरानी कस्टम प्रशासन ने भी बताया कि युद्ध के तनाव के बावजूद बंदरगाहों के ज़रिए ज़रूरी सामान देश में पहुँच रहे हैं।
| विवरण | आंकड़े/जानकारी |
|---|---|
| कुल आयातित आवश्यक सामान | लगभग 30 लाख टन |
| प्रमुख सामान | गेहूं, जौ, चावल, चाय और कुकिंग ऑयल |
| समय अवधि | 28 फरवरी से 7 अप्रैल 2026 |
| उपयोग किए गए बंदरगाह | 13 पोर्ट्स |
दुनिया भर में इस संकट का क्या असर होगा?
वर्ल्ड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट और संयुक्त राष्ट्र की संस्था IFAD ने चेतावनी दी है कि ईरान के इस संकट से पूरी दुनिया में खाद्य सुरक्षा को खतरा हो सकता है। इसका सीधा असर अफ्रीका के देशों पर भी पड़ेगा क्योंकि वहां तेल, गैस और खाद की सप्लाई चेन बाधित हो सकती है। इससे वैश्विक स्तर पर अनाज और खाद के दाम बढ़ सकते हैं जिससे भूखमरी का खतरा बढ़ेगा।
वहीं, ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने साफ किया है कि वे किसी दबाव या नाकाबंदी के तहत बातचीत नहीं करेंगे। उन्होंने मांग की है कि अमेरिका को पहले बातचीत के रास्ते में आने वाली रुकावटों को हटाना होगा।