ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच ईरान के ऊर्जा मंत्री Abbas Aliabadi ने देश के बिजली सिस्टम को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान ने अपनी बिजली बनाने के तरीके को विकेंद्रीकृत (decentralized) कर दिया है, जिससे किसी एक हमले से बड़े नुकसान का खतरा कम हो गया है। मंत्री ने साफ किया कि अगर किसी पावर प्लांट को निशाना बनाया जाता है, तो देश के पास उसे तुरंत फिर से बनाने और आधुनिक बनाने की पूरी योजना तैयार है। यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में युद्ध की धमकियां बढ़ रही हैं।

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ईरान के बिजली सिस्टम में क्या है खास?

ईरान के ऊर्जा मंत्री के अनुसार, देश का बिजली ग्रिड पड़ोसी खाड़ी देशों और इज़राइल के मुकाबले बहुत कम संवेदनशील है। ईरान इस वक्त देशभर में 150 से ज्यादा पावर प्लांट चला रहा है जो अलग-अलग जगहों पर स्थित हैं। Abbas Aliabadi ने सरकारी टीवी चैनल IRIB को बताया कि इस विकेंद्रीकृत सिस्टम की वजह से दुश्मन के लिए पूरे देश की बिजली ठप करना मुश्किल होगा। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कुछ समय में हुए हमलों से जो नुकसान हुआ था, उसे ठीक करने का काम तेजी से चल रहा है।

तनाव और हमलों से जुड़ी मुख्य बातें

  • पावर प्लांट की संख्या: ईरान में 150 से ज्यादा बिजली घर अलग-अलग इलाकों में फैले हुए हैं ताकि एक जगह हमला होने पर दूसरी जगह असर न पड़े।
  • हालिया हमले: अमेरिका और इज़राइल के हमलों से ईरान के पानी और बिजली के बुनियादी ढांचे को काफी नुकसान पहुंचने की बात कही गई है।
  • गैस प्लांट पर हमला: राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा 5 दिन के युद्ध विराम के दावे के बावजूद, इस्फहान (Isfahan) और खुर्रमशहर (Khorramshahr) में दो गैस प्लांट पर हमले की खबर मिली है।
  • ईरान की चेतावनी: ईरान के संसद अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf ने चेतावनी दी है कि अगर उनके बिजली घरों को निशाना बनाया गया, तो वे भी जवाबी कार्रवाई करेंगे।

अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का सच

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया था कि ईरान के साथ उनकी बहुत अच्छी और सार्थक बातचीत हुई है, जिसके बाद उन्होंने हमलों को 5 दिनों के लिए टाल दिया है। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के साथ किसी भी तरह की सीधी बातचीत से पूरी तरह इनकार किया है। ईरानी अधिकारियों ने ट्रंप के बयान को केवल बाजार पर असर डालने और सैन्य तैयारी के लिए समय जुटाने वाला बताया है। खबर है कि ओमान, पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र जैसे देश इस मामले में मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं और केवल संदेशों का आदान-प्रदान हो रहा है।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.