ईरान के इटली में राजदूत Mohammad Reza Sabouri ने दुनिया के सामने एक बड़ा दावा किया है. उन्होंने कहा कि यूरोप की चुप्पी और इसराइल की हरकतों की वजह से ही आज पश्चिम एशिया के इलाकों में अस्थिरता बढ़ी है. यह बयान उन्होंने इटली के Cagliari शहर में आयोजित इंटरनेशनल मेडिटेरेनियन पॉलिसी कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए दिया.
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यूरोप की चुप्पी और बाहरी ताकतों का दखल
Sabouri ने साफ़ शब्दों में कहा कि यूरोप ने जिस तरह इसराइल के तौर-तरीकों पर चुप्पी साधी है, वही इस पूरे विवाद की असली वजह है. उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में विदेशी ताकतों की मौजूदगी ने Red Sea और Persian Gulf जैसे इलाकों में असुरक्षा पैदा कर दी है. उनके मुताबिक, अब इस क्षेत्र में ताकत का संतुलन और मुकाबला करने के तरीके बदल रहे हैं.
सीज़फायर और ईरान की जवाबी कार्रवाई
राजदूत ने जानकारी दी कि ईरान ने इस शर्त पर सीज़फायर के लिए सहमति दी थी कि लेबनान समेत पूरे क्षेत्र में लड़ाई बंद हो. लेकिन उनके अनुसार इसराइल ने बार-बार नियमों का उल्लंघन किया. साथ ही, अमेरिका ने ईरान के जहाजों और बंदरगाहों पर हमले किए. ईरान ने इन हमलों का जवाब UN Charter के Article 51 के तहत अपनी रक्षा के लिए दिया.
समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा का संकट
ईरान का दावा है कि वह समुद्री रास्तों की सुरक्षा करने वाला देश है. दुनिया की करीब 20 प्रतिशत ऊर्जा Strait of Hormuz के रास्ते गुज़रती है. Sabouri ने कहा कि अमेरिका और इसराइल ने इस क्षेत्र के समुद्री और हवाई रास्तों का गलत इस्तेमाल किया है, जिससे संकट बढ़ा है. उन्होंने कहा कि अगर पूरा सुरक्षा माहौल वापस लाना है, तो सैन्य हमलों को रोकना होगा और नेवल ब्लॉकेड हटाना पड़ेगा.
