ईरान ने इजरायल के लिए जासूसी और विरोध प्रदर्शनों के दौरान तोड़फोड़ के आरोप में एक व्यक्ति को फांसी दे दी है. इस व्यक्ति का नाम एरफान कियानी था, जिसे शनिवार, 25 अप्रैल, 2026 को सजा दी गई. उस पर इस्फहान प्रांत में हुए प्रदर्शनों के दौरान इजरायली खुफिया एजेंसी के लिए काम करने के गंभीर आरोप थे.

एरफान कियानी पर क्या आरोप लगे थे?

ईरानी न्यायपालिका के अनुसार, कियानी पर जनवरी 2026 में इस्फहान प्रांत में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान Mossad के लिए मिशन चलाने का आरोप था. उस पर सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, आगजनी करने और मोलोटोव कॉकटेल रखने व इस्तेमाल करने के मामले दर्ज थे. इसके अलावा, उस पर हथियार रखने, सड़कों को जाम करने, अधिकारियों पर हमला करने और लोगों में दहशत फैलाने जैसे आरोप भी लगाए गए थे.

ईरान में फांसी की बढ़ती रफ्तार और मौजूदा हालात क्या हैं?

28 फरवरी को ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से फांसी की घटनाओं में तेजी आई है. 19 मार्च से अब तक ईरानी अधिकारियों ने विरोध प्रदर्शनों से जुड़े आरोपों में कुल नौ लोगों को फांसी दी है. कियानी की सजा से ठीक पहले गुरुवार, 23 अप्रैल को एक अन्य व्यक्ति को फांसी दी गई थी, जिसे एक प्रतिबंधित विपक्षी समूह की सदस्यता का दोषी माना गया था.

अधिकारियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का क्या कहना है?

अर्ध-आधिकारिक तस्नीम समाचार एजेंसी ने एरफान कियानी को “मोसाद का एक भाड़े का गुंडा” बताया है. न्यायपालिका की मिजान ऑनलाइन वेबसाइट के मुताबिक, उसकी सजा को देश की सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा था. वहीं, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने चिंता जताई है कि ईरान में बंद कमरे में मुकदमे चलाए जाते हैं और जबरन कबूलनामे के आधार पर लोगों को दोषी ठहराया जाता है.

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.