ईरान में बढ़ा फांसी का सिलसिला, इसराइल के लिए जासूसी के आरोप में दो लोगों को दी गई मौत की सजा

ईरान की न्यायपालिका ने सोमवार, 3 अगस्त 2026 को दो लोगों को फांसी दे दी है। इन पर इसराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद (Mossad) के लिए जासूसी करने का आरोप था। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी मीजान (Mizan) के अनुसार, ओमीद बेहजाद और पोरया सफवत नाम के इन व्यक्तियों ने ईरान के सैन्य और सुरक्षा ठिकानों की संवेदनशील जानकारी, तस्वीरें और लोकेशन मोसाद को भेजी थी।
जासूसी के सबूत और कार्रवाई
जांच के दौरान ओमीद बेहजाद ने माना कि उसने Google Maps जैसे सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर सैन्य ठिकानों के सटीक ठिकाने साझा किए थे। इनके इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से खुफिया हैंडलर्स के साथ सीधी बातचीत के सबूत भी मिले थे। सुप्रीम कोर्ट ने 'जासूसी और ज़ायोनी शासन के साथ सहयोग' के जुर्म में इनकी मौत की सजा को बरकरार रखा था। फरवरी 2026 में इसराइल और अमेरिका के साथ तनाव बढ़ने के बाद से ईरान में फांसी की सजा देने की घटनाएं काफी बढ़ गई हैं।
विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामले
एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2026 के विरोध प्रदर्शनों से जुड़े कम से कम 26 लोगों को जुलाई महीने तक फांसी दी जा चुकी है। 28 जुलाई 2026 को इसफहान में अमीर हुसैन सफारी और अबोलफजल सेपाहि को सार्वजनिक रूप से फांसी दी गई। इसके अलावा मोहम्मद अमिनी देहाघानी, गोलमोहम्मद मोहम्मदी, इरफान एस्फ़ंदियारी और 19 साल के अरविन खेइरखाहन को भी अलग-अलग मामलों में सजा दी गई है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि रिवोल्यूशनरी कोर्ट द्वारा इन लोगों को बिना निष्पक्ष सुनवाई के सजा सुनाई गई है और अभी भी कम से कम 60 अन्य लोग मौत की कगार पर हैं।