ईरान ने शनिवार, 2 मई 2026 को एक बड़ा कदम उठाते हुए दो लोगों को फांसी दे दी है। इन दोनों व्यक्तियों पर इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के लिए जासूसी करने का गंभीर आरोप था। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब ईरान और इजरायल के बीच हालात पहले से ही बहुत तनावपूर्ण बने हुए हैं।

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किन्हें दी गई फांसी और क्या थे आरोप?

ईरानी न्यायपालिका के अनुसार, Yaqub Karimpur और Naser Bakerzadeh को जासूसी के जुर्म में दोषी पाया गया और उन्हें फांसी दी गई। इन दोनों पर लगे आरोपों का विवरण नीचे दिया गया है:

  • Yaqub Karimpur: इनके ऊपर मोसाद के एक अधिकारी को संवेदनशील जानकारी देने और सुरक्षा व सैन्य ठिकानों की फोटोग्राफी और फिल्मिंग करने का आरोप था।
  • Naser Bakerzadeh: 26 वर्षीय इस व्यक्ति पर सरकारी और धार्मिक हस्तियों के साथ-साथ इस्फ़हान प्रांत के नटांज़ परमाणु स्थल (Natanz nuclear site) जैसी अहम जगहों की जानकारी जुटाने का आरोप था।

कहां हुई फांसी और क्या हैं मानवाधिकार समूहों के दावे?

न्यायपालिका के मीडिया सेंटर ने बताया कि दोनों को Urmia Central Jail में फांसी दी गई। इस मामले में मानवाधिकार समूह Hengaw ने गहरी चिंता जताई है। समूह का कहना है कि इन दोनों को बिना किसी निष्पक्ष सुनवाई और यातनाओं के बीच मौत की सजा सुनाई गई। रिपोर्ट के मुताबिक, बाकरजादेह की सजा को केवल 10 दिनों के भीतर तीन बार बरकरार किया गया और उन्हें 25 अप्रैल को इसकी सूचना दी गई थी।

घटना की पृष्ठभूमि और मौजूदा हालात

जानकारी के अनुसार, याघूब करीमपूर को जून 2025 में ईरान और इजरायल के बीच हुए 12-दिवसीय युद्ध के दौरान गिरफ्तार किया गया था। बाकरजादेह पर भी इसी युद्ध के दौरान मोसाद को जानकारी भेजने का आरोप था। यह फांसी एक ऐसे समय में हुई है जब क्षेत्र में 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के बाद एक नाजुक युद्धविराम चल रहा है। इस कार्रवाई के बाद मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

ईरान ने किन व्यक्तियों को फांसी दी है?

ईरान ने याघूब करीमपूर (Yaqub Karimpur) और नासेर बाकरजादेह (Naser Bakerzadeh) को इजरायल और उसकी खुफिया एजेंसी मोसाद के लिए जासूसी करने के आरोप में फांसी दी है।

आरोपियों पर मुख्य रूप से क्या आरोप लगाए गए थे?

उन पर मोसाद अधिकारी को संवेदनशील जानकारी देने, सैन्य ठिकानों की फोटोग्राफी करने और नटांज़ परमाणु स्थल जैसे रणनीतिक स्थानों की जासूसी करने का आरोप था।