ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने पाकिस्तान का अपना दौरा पूरा कर लिया है और अब वह रूस के लिए रवाना हो गए हैं। इस दौरे का मुख्य मकसद अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता कराना था, जिसमें पाकिस्तान बीच-बचाव की कोशिश कर रहा था। हालांकि, इस बीच अमेरिका की तरफ से कुछ ऐसे संकेत मिले हैं जिसने इस बातचीत को थोड़ा उलझा दिया है।

पाकिस्तान दौरे में क्या हुआ और ईरान का क्या कहना है?

ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने अपने पाकिस्तान दौरे को बहुत सफल बताया। उन्होंने कहा कि ईरान ने युद्ध को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए एक सही ढांचा (workable framework) साझा किया है। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif और आर्मी चीफ Field Marshal Asim Munir से मुलाकात की। Araghchi ने यह भी कहा कि वह अभी यह देखना चाहते हैं कि अमेरिका वाकई कूटनीति और शांति के लिए गंभीर है या नहीं।

अमेरिका ने क्यों बदला अपना फैसला?

शांति बातचीत के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने अपने दो खास दूतों, Steve Witkoff और Jared Kushner का पाकिस्तान दौरा रद्द कर दिया। पहले व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव Karoline Leavitt ने इस दौरे की पुष्टि की थी और पाकिस्तान को बेहतरीन मध्यस्थ बताया था। लेकिन बाद में ट्रंप ने कहा कि ईरान वाले उन्हें कभी भी फोन कर सकते हैं। हालांकि, ट्रंप ने यह भी जिक्र किया कि उन्हें ईरान की तरफ से एक नया और बेहतर प्रस्ताव मिला है।

शांति समझौते की मुख्य शर्तें और पाकिस्तान की भूमिका

ईरान ने अपनी कुछ शर्तें रखी हैं जिनके बिना वह बातचीत आगे नहीं बढ़ाएगा। ईरान की मुख्य मांग यह है कि अमेरिका उसके बंदरगाहों और Strait of Hormuz पर लगाए गए नौसेना के नाकेबंदी (naval blockade) को हटाए। पाकिस्तान ने साफ किया है कि वह दोनों देशों के बीच शांति लाने की कोशिशें जारी रखेगा। इस दौरे के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच कोई सीधी बात नहीं हुई और ईरान ने अपनी बात पाकिस्तानी दूतों के जरिए पहुंचाई।