ईरान में इस समय हालात बहुत चिंताजनक हैं। बाज़ारों में सामान तो मौजूद है, लेकिन कीमतें इतनी तेज़ी से बढ़ी हैं कि आम परिवारों के लिए बुनियादी ज़रूरतें पूरी करना अब नामुमकिन सा हो गया है। तेल और चावल जैसी ज़रूरी चीज़ों के दाम पिछले एक साल में तीन गुना से भी ज़्यादा बढ़ गए हैं जिससे आम जनता बहुत परेशान है।
ईरान में किन चीज़ों के दाम सबसे ज़्यादा बढ़े हैं?
ईरान के शहरों में खाने-पीने के सामान की कीमतें आसमान छू रही हैं। Statistical Centre of Iran के आंकड़ों के मुताबिक, 27 अप्रैल 2026 तक खाद्य क्षेत्र में महंगाई दर 112.7 प्रतिशत तक पहुँच गई थी। Al Jazeera के रिपोर्टर Tohid Asadi ने बताया कि कई ज़रूरी सामानों के दाम पिछले साल के मुकाबले तीन गुना बढ़ गए हैं।
| सामान/सूचकांक | कीमत में बढ़ोतरी |
|---|---|
| वेजिटेबल ऑयल (वनस्पति तेल) | 300% से ज़्यादा |
| आयातित चावल (Imported Rice) | 200% से ज़्यादा |
| खाद्य क्षेत्र की महंगाई (Inflation) | 112.7% |
महंगाई बढ़ने के मुख्य कारण क्या हैं?
यह आर्थिक संकट फरवरी 2026 में शुरू हुए युद्ध की वजह से पैदा हुआ है। अमेरिका द्वारा की गई समुद्री नाकेबंदी (naval blockade) को कीमतों में इस भारी उछाल की बड़ी वजह माना जा रहा है। इसके अलावा कुछ और कारण भी हैं:
- सप्लाई में रुकावट: Strait of Hormuz में रुकावट के कारण सामान की सप्लाई चेन टूट गई है।
- खाद की कमी: पेट्रोकेमिकल प्लांट में हुए नुकसान की वजह से खाद महंगी हो गई है।
- ईंधन की लागत: ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी ने पूरे खर्च को बढ़ा दिया है।
ईरान सरकार ने अब दवाइयों, नकदी और खाने की भारी कमी को देखते हुए युद्ध विराम और Strait of Hormuz को फिर से खोलने की मांग की है।
क्या इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है?
हाँ, इस युद्ध का असर सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं है। UN की संस्था FAO ने बताया कि अप्रैल में वैश्विक खाद्य कीमतें पिछले तीन साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुँच गईं। मुख्य रूप से वेजिटेबल ऑयल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। ब्रिटेन के मुख्य सचिव Darren Jones ने कहा कि सप्लाई चेन और ईंधन की कीमतों में आए बदलाव की वजह से दुनिया भर के उपभोक्ताओं को अगले आठ महीनों तक महंगाई का सामना करना पड़ सकता है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ईरान में खाद्य महंगाई की स्थिति क्या है?
ईरान में खाद्य महंगाई बहुत गंभीर है जहाँ अप्रैल 2026 तक महंगाई दर 112.7% पहुँच गई। वेजिटेबल ऑयल की कीमत 300% और आयातित चावल की कीमत 200% से ज़्यादा बढ़ गई है।
वैश्विक स्तर पर खाने की कीमतों पर क्या असर पड़ा है?
FAO के अनुसार ईरान युद्ध और Strait of Hormuz में रुकावट की वजह से दुनिया भर में खाने की कीमतें पिछले तीन साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुँच गई हैं।
