ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची इन दिनों कूटनीतिक दौरों में व्यस्त हैं। उन्होंने हाल ही में पाकिस्तान और ओमान का दौरा किया और अब वह रूस पहुंचे हैं जहां वह राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात करेंगे। पाकिस्तान में अमेरिका के साथ बातचीत की जो कोशिशें हुई थीं, वे असफल रहीं और ईरान ने इसके लिए सीधे तौर पर अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है।

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पाकिस्तान में बातचीत क्यों नहीं हो पाई?

विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि पाकिस्तान में वार्ता इसलिए सफल नहीं हुई क्योंकि अमेरिका ने सकारात्मक रुख नहीं अपनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका ने बहुत ज्यादा मांगें रखी हैं, जिसके कारण समझौता नहीं हो सका। अराघची ने यह सवाल भी उठाया कि क्या वाशिंगटन वास्तव में कूटनीति के जरिए मसले हल करने को लेकर गंभीर है। दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की शासन व्यवस्था पर सवाल उठाए और कहा कि अगर ईरान बात करना चाहता है तो वह अमेरिका आ सकता है या फोन कर सकता है।

होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर क्या है विवाद?

होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के तेल बाजार के लिए एक बेहद अहम रास्ता है और इसे लेकर ईरान की अपनी शर्तें हैं। इस मुद्दे पर कुछ मुख्य बातें सामने आई हैं:

  • व्यापारिक जहाजों के लिए रास्ता: ईरान ने 17 अप्रैल 2026 को ऐलान किया कि सभी कमर्शियल जहाजों के लिए यह रास्ता पूरी तरह खुला है।
  • दुश्मन देशों पर पाबंदी: अराघची के मुताबिक यह रास्ता सिर्फ अमेरिका और इज़राइल जैसे देशों के लिए बंद है।
  • ईरान की मांगें: ईरान चाहता है कि इस जलमार्ग के लिए एक नई कानूनी व्यवस्था बने, उसके बंदरगाहों से अमेरिकी नाकेबंदी हटे और उसे मुआवजे का भुगतान किया जाए।
  • सुरक्षा गारंटी: ईरान ने मांग की है कि भविष्य में उस पर कोई हमला न हो, इसकी स्पष्ट गारंटी दी जाए।

रूस दौरे का क्या है मुख्य मकसद?

अराघची 27 अप्रैल 2026 को रूस में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात करेंगे। इस दौरे का मकसद इज़राइल और अमेरिका के साथ युद्ध के बाद मॉस्को के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करना है। इससे पहले वह पाकिस्तान में सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मिले थे। वहीं ओमान के विदेश मंत्री के साथ भी उन्होंने नेविगेशन की स्वतंत्रता और राजनयिक समाधानों पर चर्चा की।