ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araqchi ने साफ़ कर दिया है कि उनके लिए पड़ोसी देश सबसे ज़्यादा ज़रूरी हैं। इसी वजह से ईरान अब क्षेत्रीय बातचीत और आपसी विश्वास बढ़ाने के लिए कूटनीतिक कोशिशें तेज़ कर रहा है। हाल ही में उन्होंने इस दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं ताकि इलाके में स्थिरता बनी रहे।

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ईरान के विदेश मंत्री का दौरा और मुख्य मकसद क्या है?

अब्बास अराक़ची ने इस्लामाबाद, मस्कट और मॉस्को की यात्रा शुरू की है। इस दौरे का असली मकसद अपने सहयोगियों के साथ मिलकर क्षेत्रीय मुद्दों पर बात करना और आपसी तालमेल बिठाना है। उन्होंने साफ़ तौर पर कहा है कि क्षेत्र में बातचीत करना अब सिर्फ एक विकल्प नहीं बल्कि एक ज़रूरत बन गया है। ईरान की विदेश नीति में अब पड़ोसी देशों को सबसे ऊपर रखा गया है और राजनयिक समाधानों पर ज़्यादा ज़ोर दिया जा रहा है।

अमेरिका और इज़राइल के साथ तनाव और पाकिस्तान की भूमिका

ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम की कोशिशों में पाकिस्तान एक भरोसेमंद मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर के इस्लामाबाद जाने का प्लान रद्द कर दिया है। दूसरी तरफ, ईरान ने सार्वजनिक तौर पर इस मिशन को कम महत्व दिया है। ईरानी अधिकारियों की अमेरिकियों से सीधे मिलने की कोई योजना नहीं थी और वे पाकिस्तानी मध्यस्थों के ज़रिए ही अपनी बातें पहुँचाना चाहते थे।

होर्मुज जलडमरूमध्य और एयरपोर्ट का ताज़ा अपडेट

  • होर्मुज (Hormuz) जलडमरूमध्य: यहाँ तनाव गहरा गया है और ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने नाकाबंदी हटाने से मना कर दिया है। इसके जवाब में अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी कर दी है।
  • कानूनी अधिकार: अराक़ची ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव को बताया था कि दुश्मन के जहाजों की आवाजाही रोकना ईरान का कानूनी अधिकार है।
  • हवाई अड्डा: हाल के संघर्षों के बाद इमाम खोमेनी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (IKA) ने अपना परिचालन फिर से शुरू कर दिया है।
Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.