ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची 14 और 15 मई 2026 को नई दिल्ली आए थे। यहाँ उन्होंने साफ़ कहा कि पश्चिम एशिया के संकट को सुलझाने में भारत एक बड़ी भूमिका निभा सकता है। इस समय इलाके में युद्ध विराम काफी नाजुक है और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों को लेकर तनाव बना हुआ है।
ईरान और भारत के बीच किन बातों पर हुई चर्चा?
विदेश मंत्री अराघची ने नई दिल्ली में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मुलाकात की। इस बातचीत के मुख्य बिंदु ये रहे:
- शांति की अपील: ईरान का मानना है कि भारत की साख अच्छी है और वह क्षेत्र में शांति लाने में मदद कर सकता है।
- सैन्य समाधान नहीं: अराघची ने साफ़ किया कि ईरान से जुड़े मसलों का हल सेना के दम पर नहीं निकाला जा सकता।
- समुद्री रास्ता: ईरान ने कहा कि वह हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से जहाजों के सुरक्षित आने-जाने को सुनिश्चित करने के लिए तैयार है।
- अमेरिका से दूरी: ईरान ने बातचीत के लिए अपनी इच्छा जताई लेकिन कहा कि अमेरिका के साथ भरोसे की बहुत कमी है।
चाबहार पोर्ट और अन्य देशों का क्या रुख है?
बातचीत के दौरान चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट पर भी चर्चा हुई। ईरान ने भारत से इस प्रोजेक्ट में सहयोग जारी रखने की अपील की और इसे क्षेत्र के लिए “गोल्डन गेटवे” बताया। हालाँकि, अमेरिका के प्रतिबंधों की वजह से यह मामला पेचीदा है और भारत ने अपने 2026-27 के बजट में इसके लिए फंड नहीं रखा है।
वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूएई (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाह्यान से अबू धाबी में बात की। उन्होंने पश्चिम एशिया में शांति बहाल करने के लिए हर संभव मदद देने का वादा किया। उन्होंने यूएई पर हुए हमलों की निंदा की और कहा कि बातचीत ही समस्याओं का एकमात्र हल है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ईरान ने भारत से क्या अपील की है
ईरान ने भारत से पश्चिम एशिया में शांति लाने के लिए अपनी अच्छी साख का इस्तेमाल करने और चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट में सहयोग जारी रखने की अपील की है।
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में क्या समस्या है
ईरान के विदेश मंत्री के अनुसार अमेरिका के साथ बातचीत में भरोसे की बहुत कमी है, जिस वजह से बातचीत सही तरीके से नहीं हो पा रही है।
