अमेरिका की आर्थिक धमकियों पर ईरान का कड़ा पलटवार, तेहरान ने दी चेतावनी.

ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने हाल ही में अमेरिका की तरफ से मिल रही आर्थिक और सैन्य धमकियों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने अमेरिका के इन तरीकों को पुराना और बेकार हथकंडा बताया है। उनका कहना है कि तेहरान अमेरिका की इन पुरानी चालों का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है और डरने वाला नहीं है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए उन्होंने पुराने दिनों को याद किया जब अमेरिका ने चौदह साल पहले सबसे कड़े प्रतिबंध लगाए थे, आठ साल पहले अधिकतम दबाव की नीति अपनाई थी और पांच महीने पहले बिना शर्त सरेंडर करने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि अमेरिका का यह नया आर्थिक डी-डे भी पहले की तरह पूरी तरह फेल हो जाएगा।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव
यह सारा विवाद हाल ही में अमेरिका की तरफ से उठाए गए कदमों के बाद शुरू हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के खिलाफ एक सख्त वित्तीय अभियान चलाने की बात कही है। इसके अलावा, अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने आने वाले सोमवार यानी 24 अगस्त 2026 को इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक नक्शे को शेयर करते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य को नया अमेरिकी क्षेत्र बताया है, जबकि उपराष्ट्रपति JD Vance का कहना है कि अमेरिका के प्रभाव के लिए आर्थिक दबाव सबसे बड़ा हथियार है। दूसरी तरफ, ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने इस पूरी स्थिति को आर्थिक, सैन्य और सुरक्षा का पूर्ण युद्ध बताया है और कहा है कि पूरी दुनिया ईरान की ताकत और फैसले को जानती है।
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख Mohsen Rezaei ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि जो भी देश अमेरिकी प्रतिबंधों का साथ देगा, उसे ईरान का दुश्मन माना जाएगा। ईरान का साफ कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद है, हालांकि कुछ चुनिंदा इराकी तेल टैंकरों को वहां से जाने की छूट दी गई है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने आने वाले प्रतिबंधों को युद्ध की घोषणा बताया है जिसका अंतरराष्ट्रीय कानून में कोई आधार नहीं है। संसद के स्पीकर Mohammad Ghalibaf ने जानकारी दी है कि उन्हें पड़ोसी देशों से नई सुरक्षा और आर्थिक सहयोग के संदेश मिले हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका इस इलाके की सुरक्षा को दांव पर लगाकर सिर्फ इजराइल को फायदा पहुंचा रहा है।
सैन्य तैयारी और कूटनीतिक बैठकें
ईरान की सेना के तेवर भी अब बदल चुके हैं। सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल Mohammad Akraminia ने कहा है कि देश अब आक्रामक नीति की तरफ बढ़ रहा है। वहीं, सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ Ali Abdollahi ने वादा किया है कि नई धमकियों का बहुत ही कड़ा और खतरनाक जवाब दिया जाएगा। रक्षा मंत्रालय ने यह भी बताया कि पिछले एक साल में देश के अंदर हथियारों का उत्पादन दोगुना कर दिया गया है। इन सब के बीच बातचीत के रास्ते भी खुले हुए हैं। मिस्र के विदेश मंत्री ने ईरानी समकक्ष से फोन पर बात कर इस संघर्ष पर चर्चा की है। इसके अलावा, पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल Asim Munir भी 24 अगस्त 2026 को तेहरान के दौरे पर आने वाले हैं। तेहरान के एंगेलाब स्क्वायर पर प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका और इजराइल की नीतियों का विरोध करने के लिए बेंजामिन नेतन्याहू और डोनाल्ड ट्रंप के पुतले भी लटकाए।