ईरान के विदेश मंत्री का बड़ा बयान, अमेरिका और इजरायल को दी चेतावनी, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बदला नियम
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने 25 मार्च 2026 को आधिकारिक बयान जारी कर अपनी संप्रभुता की रक्षा करने का संकल्प दोहराया है। अरागची ने अमेरिका और इजरायल के हमलों को क्षेत्रीय अस्थिरता की मुख्य वजह बताया है। उन्होंने साफ कहा कि ईरान तब तक अपनी रक्षात्मक और जवाबी कार्रवाई जारी रखेगा जब तक दुश्मनों को अपनी गलती पर पछतावा नहीं होता। इस बयान के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
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होर्मुज जलडमरूमध्य पर पाबंदी और तेल की कीमतों पर असर
ईरान ने समुद्र के रास्ते व्यापार को लेकर कड़ा रुख अपना लिया है। अरागची ने पुष्टि की है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) उन सभी जहाजों के लिए बंद रहेगा जो अमेरिका, इजरायल या उनके सैन्य अभियानों में मदद करने वाले देशों से संबंधित हैं। हालांकि, अन्य देशों के जहाज ईरानी अधिकारियों के साथ तालमेल बिठाकर वहां से गुजर सकते हैं।
- अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट के अनुसार, वैश्विक तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए इस रास्ते का खुलना बहुत जरूरी है।
- समुद्री रास्ते बंद होने से खाड़ी देशों में काम करने वाले प्रवासियों और वहां से होने वाले व्यापार पर सीधा असर पड़ेगा।
- कॉर्पोरेट सेक्टर को डर है कि इस संघर्ष की वजह से 2026 की आखिरी तिमाही और 2027 की शुरुआत में कंपनियों के मुनाफे में कमी आ सकती है।
गुप्त बातचीत और राजनयिकों को मिली सुरक्षा की गारंटी
एक तरफ जहां ईरान कड़े तेवर दिखा रहा है, वहीं दूसरी तरफ पर्दे के पीछे बातचीत की खबरें भी आ रही हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायल ने ईरान के विदेश मंत्री अरागची और संसद के स्पीकर कालीबाफ को पांच दिनों के लिए सुरक्षा की गारंटी दी है ताकि बातचीत का रास्ता तलाशा जा सके।
| महत्वपूर्ण घटना | ताजा अपडेट |
|---|---|
| ईरान का रुख | आत्मरक्षा के अधिकार पर अडिग |
| बातचीत की संभावना | सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने बातचीत को मंजूरी दी |
| अमेरिकी दावा | राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान डील के लिए बातचीत कर रहा है |
| जर्मनी का स्टैंड | राष्ट्रपति स्टीनमेयर ने ईरानी नागरिकों के खिलाफ उल्लंघन की निंदा की |
विश्व स्तर पर ईरान की नई रणनीति
अरागची ने वैश्विक व्यवस्था में ‘दोहरे मापदंड’ की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए जा रहे हमलों पर दुनिया की चुप्पी चिंताजनक है। ईरान अब चीन, तुर्की और मलेशिया जैसे देशों के साथ संपर्क में है ताकि अपनी स्थिति मजबूत कर सके। विदेश मंत्रालय ने यह भी चेतावनी दी है कि जो भी देश ईरान पर हमले के लिए अमेरिकी सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करने देंगे, उन्हें भी इस संघर्ष में शामिल माना जाएगा। इसका सीधा मतलब है कि खाड़ी के उन देशों के लिए खतरा बढ़ सकता है जहां अमेरिकी बेस मौजूद हैं।





