ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) ने उस भयानक हमले की आंखों देखी कहानी साझा की है जिसमें सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी। उन्होंने बताया कि वह खुद हमले के वक्त खामेनेई के दफ्तर में मौजूद थे और किसी तरह मलबे से सुरक्षित बाहर निकले। यह हमला अमेरिका और इसराइल की सेना ने मिलकर किया था जिसमें ईरान के सबसे बड़े नेता की जान चली गई थी।

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हमले के समय आखिर क्या हुआ था?

अब्बास अराघची ने लेबनान के अल मयादीन नेटवर्क को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि 28 फरवरी को सुबह 9 बजे वह जेनेवा वार्ता की रिपोर्ट देने सुप्रीम लीडर के दफ्तर पहुंचे थे। उसी दौरान अमेरिका और इसराइल की सेना ने मिलकर हवाई हमला कर दिया। अराघची ने बताया कि वह जिस हिस्से में बैठे थे, वह पूरी तरह तबाह नहीं हुआ था, जिसके कारण वह मलबे से सुरक्षित बाहर निकल आए। उन्होंने बताया कि मलबे से निकलने के बाद अगले 48 घंटे तक उन्हें अपनी जान की नहीं, बल्कि सिर्फ सुप्रीम लीडर की चिंता सता रही थी।

सुप्रीम लीडर ने बंकर में जाने से कर दिया था इनकार

इस बातचीत में यह भी खुलासा हुआ कि युद्ध की आशंकाओं और चेतावनियों के बावजूद सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने सुरक्षित बंकर में जाने से साफ मना कर दिया था। इस भीषण हमले में 86 वर्षीय अली खामेनेई की मौत हो गई थी, जिसके बाद ईरान में 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई थी। अब अली खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) को ईरान का नया सुप्रीम लीडर नियुक्त किया गया है। इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में तनाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है और सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर रख रही हैं।

Frequently Asked Questions (FAQs)

ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई पर हमला कब हुआ था?

यह हमला 28 फरवरी को हुआ था, जिसमें अमेरिका और इसराइल की सेना ने मिलकर ईरान की राजधानी तेहरान में उनके कार्यालय को निशाना बनाया था।

अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान का नया सुप्रीम लीडर किसे बनाया गया है?

अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मुजतबा खामेनेई को ईरान का नया सुप्रीम लीडर नियुक्त किया गया है।