ईरान के पूर्व विदेश मंत्री और यूनिवर्सिटी ऑफ तेहरान के प्रोफेसर मोहम्मद जावद ज़रीफ़ ने अमेरिका और इसराइल के साथ चल रहे तनाव को खत्म करने की बात कही है। उन्होंने अल जज़ीरा में लिखे एक लेख में कहा कि अब ईरान को युद्ध छोड़कर बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए। उनका मानना है कि कूटनीति के जरिए ही देश को आर्थिक पाबंदियों से छुटकारा मिल सकता है।

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ज़रीफ़ ने शांति के लिए क्या सुझाव दिए हैं?

मोहम्मद जावद ज़रीफ़ ने अपने लेख में कुछ बड़े सुझाव दिए हैं ताकि क्षेत्र में तनाव कम हो सके। उनके मुख्य सुझाव इस प्रकार हैं:

  • जीत का ऐलान: ईरान को इसराइल और अमेरिका के साथ चल रहे युद्ध में अपनी जीत घोषित कर देनी चाहिए।
  • परमाणु कार्यक्रम: ईरान अपने परमाणु प्रोग्राम पर कुछ सीमाएं लगा सकता है।
  • हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य: इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते को फिर से खोलने की बात कही गई है।
  • पाबंदियों से राहत: इन कदमों के बदले अमेरिका से आर्थिक पाबंदियों को हटाने और तनाव कम करने की मांग की गई है।

क्षेत्रीय सुरक्षा और अन्य देशों की भूमिका क्या है?

ज़रीफ़ का कहना है कि पश्चिम एशिया के देशों को अपनी सुरक्षा के लिए बाहरी देशों के सिस्टम पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उन्होंने क्षेत्रीय स्तर पर आपसी सहयोग और नेटवर्किंग को मज़बूत करने पर ज़ोर दिया है। इस बीच चीन ने भी युद्धविराम और तनाव कम करने की अपील की है, जो ज़रीफ़ के विचारों से मेल खाता है।

हालाँकि ईरान की सरकार ने आधिकारिक तौर पर ज़रीफ़ के इन सुझावों को खारिज कर दिया, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान की व्यावहारिक कार्रवाई ज़रीफ़ की बातों जैसी ही रही। इस मामले पर द जेरूसलम स्ट्रेटजिक ट्रिब्यून ने भी चर्चा की है कि क्या चीन ने ईरान के युद्धविराम में कोई भूमिका निभाई है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

मोहम्मद जावद ज़रीफ़ कौन हैं?

वह ईरान के पूर्व उपराष्ट्रपति और विदेश मंत्री रहे हैं। फिलहाल वह यूनिवर्सिटी ऑफ तेहरान में ग्लोबल स्टडीज के प्रोफेसर हैं और ईरान परमाणु समझौते के मुख्य वास्तुकारों में से एक थे।

ज़रीफ़ के सुझावों पर ईरान सरकार की क्या प्रतिक्रिया थी?

ईरान के अधिकारियों ने आधिकारिक तौर पर ज़रीफ़ के प्रस्तावों को खारिज कर दिया था, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान के व्यावहारिक कदमों में उन सुझावों की झलक देखी गई।