ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खमनेई का अंतिम सफर गुरुवार को मश्हद शहर में पूरा हुआ। अमेरिका और इसराइल के संयुक्त हमले में उनकी मौत के बाद छह दिनों तक चला यह बड़ा आयोजन था। मश्हद के पवित्र इमाम रज़ा मंदिर में उनके दफ़न के लिए लाखों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी है।
ईरान के सरकारी प्रसारक ने बताया कि इस अंतिम विदाई में लोगों की संख्या अब तक की सबसे ज़्यादा रही। अली खमनेई की मौत 28 फरवरी 2026 को हुई थी, जिसकी पुष्टि 1 मार्च को की गई। इस घटना के बाद ईरान में 40 दिनों का राष्ट्रीय शोक और सात दिनों की सरकारी छुट्टी घोषित की गई थी। इराक सरकार ने भी इस मौके पर आधिकारिक छुट्टी रखी ताकि अंतिम संस्कार की रस्मों में मदद मिल सके।
खमनेई के बेटे मुजतबा खमनेई को 8 मार्च को नया सुप्रीम लीडर नियुक्त किया गया। हालांकि, हमले में चोटिल होने की वजह से वे अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। यह जनाज़ा तेहरान, কোম, नजाफ और कर्बला जैसे बड़े शहरों से होते हुए मश्हद पहुँचा। मश्हद के गवर्नर हसन होसेनी ने उम्मीद जताई कि दफ़न के समय करीब 1.5 करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं। खमनेई ने अपनी इच्छा जताई थी कि उन्हें इमाम रज़ा मंदिर में ही दफ़नाया जाए।
बढ़ा क्षेत्रीय तनाव और हमले
इस शोक के माहौल के बीच इलाके में तनाव फिर से बढ़ गया है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने जानकारी दी कि अमेरिका ने मश्हद जाने वाले रास्ते के दो पुलों पर रात में हमले किए। वहीं, जॉर्डन की सेना ने ईरान की तरफ से छोड़ी गई 8 मिसाइलों को हवा में ही रोक लिया। ऐसी भी खबर है कि अमेरिका ने बुशेहर न्यूक्लियर पावर प्लांट के बाहरी इलाके को निशाना बनाया है।
मश्हद में जमा भीड़ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ नारे लगा रही थी। ट्रम्प ने खमनेई की मौत का जश्न मनाया था और उन्हें इतिहास के सबसे बुरे लोगों में से एक बताया था। इस हमले को लेकर ईरान ने अब अमेरिका और इसराइल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
