Strait of Hormuz के समुद्री रास्ते से बारूदी सुरंगें (mines) हटाने को लेकर ईरान और फ्रांस के बीच विवाद शुरू हो गया है. ईरान ने साफ़ कह दिया है कि इस काम को सिर्फ वही करेगा और किसी भी बाहरी देश की मदद नहीं ली जाएगी. फ्रांस ने ओमान के साथ मिलकर इस रास्ते को साफ़ करने का फैसला किया था, जिस पर ईरान ने कड़ी आपत्ति जताई है.

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ईरान ने फ्रांस को दी चेतावनी

ईरान के डिप्टी फॉरेन मिनिस्टर Kazem Gharibabadi ने कहा कि Strait of Hormuz में बारूदी सुरंगें हटाने का काम सिर्फ ईरान के हाथ में है. उन्होंने फ्रांस को चेतावनी दी है कि वह इस मामले में उकसावे वाली हरकतें न करे, क्योंकि इससे समुद्री हालात और ज्यादा जटिल हो सकते हैं. Gharibabadi ने ‘Islamabad memorandum of understanding’ के आर्टिकल 5 का हवाला दिया और बताया कि इस रणनीतिक समुद्री रास्ते का मैनेजमेंट और सफाई का काम ईरान की जिम्मेदारी है. उन्होंने साफ़ किया कि ईरान किसी भी बाहरी देश को इस काम की अनुमति नहीं देगा.

फ्रांस और ओमान की संयुक्त योजना

दूसरी तरफ, फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने ओमान के सुल्तान Haitham bin Tariq के साथ मुलाकात के बाद एक अलग फैसला सुनाया. उन्होंने कहा कि फ्रांस और ओमान मिलकर इस रास्ते को साफ़ करेंगे ताकि जहाजों का आना-जाना बिना किसी रुकावट के हो सके. दोनों देशों ने एक साझा बयान में कहा कि वे समुद्री कानून के हिसाब से ‘फ्री नेविगेशन’ यानी बिना शर्त आवाजाही को बढ़ावा देंगे और मिलकर माइन्स हटाने का काम करेंगे.

ओमान का रुख और ताजा अपडेट

ओमान के विदेश मंत्री Badr al-Busaidi ने कन्फर्म किया कि ओमान इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से कोई ट्रांजिट फीस नहीं लेगा, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय नियमों में इसकी मनाही है. हाल ही में ईरान और ओमान की एक जॉइंट कमेटी मस्कट में मिली, जहाँ इस समुद्री रास्ते के भविष्य और मैनेजमेंट पर चर्चा हुई. इसके अलावा, International Maritime Organization (IMO) ने 26 जून को बताया कि एक कार्गो शिप पर हमले के बाद उन्होंने फंसे हुए नाविकों को निकालने का काम फिलहाल रोक दिया है.