ईरान के विदेश मंत्री Seyyed Abbas Araghchi और फ्रांस के विदेश मंत्री Jean-Noël Barrot के बीच रविवार रात फोन पर चर्चा हुई. इस बातचीत में मुख्य रूप से इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच हुई बैठकों के ताज़ा हालात पर बात की गई. बता दें कि पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुई ये हाई-लेवल बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म हुई है.

इस्लामाबाद में क्या हुई थी बातचीत और क्या रहा नतीजा?

ईरान और अमेरिका के बीच 11 और 12 अप्रैल 2026 को इस्लामाबाद में अहम बैठकें हुई थीं. इन बातचीत का मकसद 2026 के युद्ध विराम को स्थिर करना और विवादों को सुलझाना था. यह 1979 के बाद से दोनों देशों के बीच सबसे बड़ी सीधी बातचीत थी. करीब 21 घंटे तक चली इस चर्चा के बाद दोनों देशों के प्रतिनिधि बिना किसी डील के वापस लौट गए.

किन बड़े मुद्दों पर नहीं बन पाई सहमति?

बातचीत के दौरान कई ऐसे मुद्दे थे जिन पर दोनों देशों के बीच गहरा मतभेद रहा. मुख्य विवादों की सूची नीचे दी गई है:

  • ईरान का परमाणु कार्यक्रम और Strait of Hormuz की स्थिति.
  • ईरान की मांग थी कि हिजबुल्लाह पर इजराइली हमले बंद हों.
  • ईरान ने अपनी जमा की हुई 6 अरब डॉलर की संपत्ति वापस मांगी.
  • अमेरिका की प्राथमिकता यह थी कि ईरान परमाणु क्षमता हासिल न कर सके.

बातचीत विफल होने के बाद बड़े नेताओं ने क्या कहा?

अमेरिकी टीम का नेतृत्व कर रहे उपराष्ट्रपति JD Vance ने कहा कि अमेरिका लचीला था लेकिन ईरान के साथ कोई सहमति नहीं बन सकी. दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री Araghchi ने अमेरिकी रुख को सख्त बताया. उन्होंने कहा कि उपराष्ट्रपति Vance ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बात की थी, जिससे अमेरिका का नजरिया बदल गया.

Sushma Kumari

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