ईरान की राजधानी तेहरान के मशहूर Golestan Palace में हुई तबाही को देखने के लिए दुनिया भर से पत्रकार और मीडिया कर्मी पहुंचे. 3 जुलाई 2026 को हुए इस दौरे में विदेशी टीमों ने महल के उन हिस्सों को देखा जो मिसाइल हमले में तबाह हो गए थे. यह दौरा दुनिया को यह बताने के लिए किया गया कि युद्ध की वजह से सांस्कृतिक धरोहरों का कितना नुकसान हो रहा है.
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इरानी अधिकारियों के मुताबिक, 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए अमेरिका और इसराइल के हमलों ने देश की कई ऐतिहासिक जगहों को नुकसान पहुंचाया है. विशेष रूप से 2 मार्च 2026 को Arg Square के पास हुए एक मिसाइल हमले से Golestan Palace को भारी क्षति पहुंची. इस दौरे के दौरान सुरक्षा के लिहाज से पत्रकारों को हेलमेट पहनने पड़े क्योंकि वहां अभी भी मरम्मत और सुधार का काम चल रहा है.
ईरान के सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन मंत्री Reza Salehi Amiri ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है. उन्होंने बताया कि देश के 20 प्रांतों में लगभग 140 ऐतिहासिक स्थल क्षतिग्रस्त हुए हैं और इसमें करीब 49 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है. वहीं, तेहरान नगर परिषद के सांस्कृतिक विरासत समिति के प्रमुख Ahmad Alavi ने कहा कि करीब 120 म्यूजियम और सांस्कृतिक खजानों को सीधे तौर पर निशाना बनाया गया जिससे उन्हें ढांचागत नुकसान पहुंचा है.
UNESCO ने भी Golestan Palace के साथ-साथ Isfahan के Chehel Sotoun Palace और Masjed-e Jāme में हुए नुकसान की पुष्टि की है. ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने UNESCO के सहयोग के लिए आभार जताया और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाने की मांग की. उन्होंने इसराइल पर ईरान के ऐतिहासिक स्मारकों को बमबारी करने का आरोप लगाया.
इस तबाही के विरोध में 4 जुलाई 2026 को आम लोगों और गैर सरकारी संगठनों ने गोलिस्तान पैलेस पर एक मानव श्रृंखला (Human Chain) बनाई. वहां मौजूद लोगों ने तख्तियां लेकर ऐतिहासिक इमारतों पर हमलों का विरोध किया और UNESCO को एक याचिका सौंपी ताकि इस मामले में कानूनी कार्रवाई की जा सके.
