लेबनान पर इसराइल के लगातार बढ़ते हमलों के बीच ईरान ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। ईरान की बातचीत करने वाली टीम ने अमेरिका के साथ मध्यस्थों के जरिए होने वाले संदेशों के आदान-प्रदान को पूरी तरह से रोक दिया है। ईरानी मीडिया और सरकारी अधिकारियों के अनुसार, यह फैसला लेबनान में इसराइल की सैन्य कार्रवाई के विरोध में लिया गया है। इस फैसले के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव और ज्यादा गहराने की आशंका बढ़ गई है।

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ईरान ने बातचीत रोकने का फैसला क्यों लिया?

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने बताया कि अमेरिका के साथ चल रही बातचीत में काफी अविश्वास था। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी पक्ष की तरफ से लगातार विरोधाभासी मांगें रखी जा रही थीं, जिससे बातचीत लंबी खिंच रही थी। ईरान का साफ कहना है कि वह लेबनान में इसराइल के हमलों को अमेरिका से अलग करके नहीं देखता है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची ने चेतावनी दी है कि किसी भी समझौते में लेबनान में युद्धविराम शामिल होना जरूरी है, नहीं तो इसे हर मोर्चे पर समझौते का उल्लंघन माना जाएगा।

बातचीत दोबारा शुरू करने के लिए ईरान ने क्या रखी शर्तें?

ईरानी अधिकारियों ने साफ शब्दों में अपनी शर्तें रख दी हैं जिसके बिना अमेरिका से दोबारा संपर्क नहीं साधा जाएगा:

  • हमलों पर तुरंत रोक: इसराइल को लेबनान और गाजा दोनों जगहों पर अपने सैन्य अभियानों को पूरी तरह से बंद करना होगा।
  • सेना की पूरी वापसी: इसराइली सेना को लेबनान के कब्जे वाले क्षेत्रों से पीछे हटना होगा।
  • युद्ध रोकना पहली प्राथमिकता: ईरान ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल परमाणु मुद्दों पर कोई बातचीत नहीं हो रही है और उनका एकमात्र ध्यान युद्ध को रोकना है।

ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बागेर गालिबफ ने सार्वजनिक रूप से कहा कि ईरान के बंदरगाहों की अमेरिकी नौसेना द्वारा की जा रही घेराबंदी और लेबनान में हमले इस बात का सबूत हैं कि अमेरिका युद्धविराम का पालन नहीं कर रहा है।

क्षेत्र में बढ़ता जा रहा है सैन्य टकराव

इस बीच क्षेत्र में सैन्य झड़पें भी तेज हो गई हैं। अमेरिकी सेना ने ईरान के रडार और ड्रोन ठिकानों पर हमले किए हैं, जिसके जवाब में ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया है। वहीं कुवैत ने भी अपने क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमलों को हवा में मार गिराने की सूचना दी है। बिगड़ते हालात को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपातकालीन बैठक बुलाए जाने की उम्मीद है और यूरोपीय संघ ने भी इसराइल से तनाव कम करने की अपील की है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत क्यों बंद की है?

ईरान ने लेबनान में इसराइल के बढ़ते सैन्य हमलों और अमेरिकी नौसेना की घेराबंदी के विरोध में अमेरिका के साथ मध्यस्थों के जरिए होने वाले संदेशों के आदान-प्रदान को रोक दिया है।

क्या ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत दोबारा शुरू हो सकती है?

ईरान ने साफ किया है कि जब तक इसराइल लेबनान और गाजा में हमले बंद नहीं करता और कब्जे वाले क्षेत्रों से पूरी तरह पीछे नहीं हटता, तब तक कोई बातचीत शुरू नहीं होगी।