1 अप्रैल 2026 को ईरान, लेबनान के हिजबुल्लाह और यमन के हुतियों ने मिलकर इजरायल पर एक बड़ा साझा हमला किया है। इस हमले में लगभग 50 मिसाइलें और ड्रोन दागे गए हैं जिससे पूरे इलाके में तनाव काफी ज्यादा बढ़ गया है। इजरायल के कई शहरों में लगातार हवाई हमले के सायरन बज रहे हैं और लोगों को सुरक्षित ठिकानों में छिपने को कहा गया है। इस घटना के बाद खाड़ी देशों और दुनिया भर में सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जा रही है।

हमले में कहां-कहां हुआ नुकसान और क्या हैं ताजा हालात

ईरान और हिजबुल्लाह ने मिलकर इजरायल के तेल अवीव और मध्य इजरायल के इलाकों को निशाना बनाया है। हालांकि इजरायल के डिफेंस सिस्टम ने ज्यादातर मिसाइलों को हवा में ही रोक दिया, लेकिन कई जगहों पर रॉकेट के टुकड़े गिरने से नुकसान हुआ है। तेल अवीव के पास बेनी ब्राक इलाके में कुछ लोगों के घायल होने की खबर है और वहां धुएं के बड़े गुबार देखे गए हैं।

  • कुल मिसाइलें: लगभग 50 मिसाइलें और ड्रोन दागे गए।
  • निशाना: तेल अवीव, गोलन हाइट्स और मध्य इजरायल के 8 अलग-अलग स्थान।
  • दावा: हिजबुल्लाह ने हाइफा के पास सैन्य फैक्ट्री और सफ़ेद इलाके में सैन्य कैंप पर हमले का दावा किया है।
  • हताहत: कई लोग घायल हुए हैं और मलबे से इमारतों को नुकसान पहुंचा है।

इजरायल की जवाबी कार्रवाई और सऊदी अरब का रुख

इस हमले के तुरंत बाद इजरायली सेना ने लेबनान और ईरान में जवाबी हमले शुरू कर दिए हैं। इजरायल ने दावा किया है कि उसने बेरूत में हिजबुल्लाह के एक बड़े कमांडर यूसुफ इस्माइल हाशमी को एक हवाई हमले में मार गिराया है। इजरायली रक्षा मंत्री ने लेबनान सीमा के पास एक सुरक्षा घेरा बनाने की बात कही है और सीमावर्ती गांवों के निवासियों को फिलहाल वापस न लौटने की चेतावनी दी है।

वहीं सऊदी अरब ने इस पूरे मामले पर अपना रुख साफ किया है। सऊदी विदेश मंत्रालय ने ईरान द्वारा किए गए हमलों की निंदा की है। साथ ही सऊदी सरकार ने दोबारा यह दोहराया है कि वह अपनी जमीन या हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए नहीं होने देगा। अमेरिका की तरफ से भी इस स्थिति पर नजर रखी जा रही है और पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि वे शांति के लिए बातचीत के रास्ते तलाश सकते हैं।