Iran News: ईरान ने फिर दी क्षेत्रीय सुरक्षा को चुनौती, कासिम सुलेमानी की याद में गूंजी चेतावनी और बढ़ी हलचल.

Aanya20 August 20263 min read78 viewsWorld
Iran News: ईरान ने फिर दी क्षेत्रीय सुरक्षा को चुनौती, कासिम सुलेमानी की याद में गूंजी चेतावनी और बढ़ी हलचल.

मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर से काफी बढ़ गया है, जहां ईरान ने अपने दिवंगत जनरल कासिम सुलेमानी की याद में बड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया है। इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी (IRNA) ने 20 अगस्त 2026 को जनरल कासिम सुलेमानी को याद करते हुए एक बार फिर से कड़े तेवर दिखाए हैं। ईरानी अधिकारियों का साफ कहना है कि अगर क्षेत्र में कोई भी संघर्ष होता है, तो इससे उनके दुश्मनों की संपत्तियों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया जाएगा। इस तरह की चेतावनियों के सामने आने से पूरे खाड़ी देशों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर बड़ा असर पड़ रहा है, जिससे वहां रहने वाले प्रवासियों और आम लोगों के बीच भी चिंता का माहौल बन गया है।

ईरान के बड़े नेता का बगदाद दौरा और नए आदेश की मांग

इस पूरे घटनाक्रम के बीच, 19 अगस्त 2026 को ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर गालिबफ ने इराक की राजधानी बगदाद का दौरा किया। बगदाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरने के बाद, गालिबफ सीधे उस जगह पर पहुंचे जहां जनवरी 2020 में अमेरिका के ड्रोन हमले में जनरल कासिम सुलेमानी और अबू महदी अल-मुहंदिस मारे गए थे। वहां उन्होंने श्रद्धांजलि दी और क्षेत्र में बाहरी ताकतों को बाहर रखकर आपसी सहयोग बढ़ाने और एक 'नया आदेश' लाने की बात कही। उन्होंने यह भी कहा कि इराक में प्रतिरोध अब वैश्विक ताकत का एक अहम हिस्सा बन चुका है। उनके इस बयान के बाद इराकी प्रधानमंत्री अली अल-जैदी के समर्थकों ने तीखी आलोचना की, क्योंकि प्रधानमंत्री इस समय देश में हथियारों को केवल सरकारी नियंत्रण में लाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं।

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इराक के नेताओं के साथ उच्च स्तरीय बैठकें

बगदाद में अपने प्रवास के दौरान, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर गालिबफ ने इराक के कई शीर्ष नेताओं के साथ औपचारिक बैठकें कीं। उन्होंने इराकी प्रधानमंत्री अली अल-जैदी, इराकी संसद के स्पीकर हैबत अल-हलबूसी और राष्ट्रपति निजार मोहम्मद सईद अमिदी से मुलाकात की। इन बैठकों में दोनों देशों के आपसी रिश्तों, बॉर्डर की सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और आर्थिक सहयोग जैसे तमाम गंभीर मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। हालांकि, ईरान के लगातार बढ़ते दखल से खाड़ी देशों में कूटनीतिक दबाव लगातार बनता जा रहा है।

खाड़ी देशों और अमेरिकी सेना को लेकर ईरान की कड़ी चेतावनी

दूसरी तरफ, इसी दौरान 19 अगस्त 2026 को ईरानी सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ अली अब्दोल्लाही ने गल्फ देशों को एक बेहद सख्त चेतावनी जारी की। उन्होंने दो टूक कहा कि अगर किसी भी गल्फ देश ने अमेरिकी सेना की मदद की, तो उसे अमेरिकी सैन्य अभियानों में सीधा हिस्सा लेना माना जाएगा। अब्दोल्लाही ने क्षेत्रीय सैन्य अड्डों पर अमेरिकी विमानों, खासकर ईंधन भरने वाले टैंकरों की मौजूदगी पर सवाल उठाए और कहा कि ऐसा लगता है कि ये सब मेजबान देशों की पूरी जानकारी के बिना हो रहा है। इस चेतावनी से खाड़ी देशों में काम करने वाले लाखों प्रवासियों और कामगारों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर से सवाल खड़े हो गए हैं।

हथियारों का समर्पण और अमेरिका के आर्थिक प्रतिबंधों का दबाव

इन सभी घटनाओं के बीच, अमेरिकी सरकार की तरफ से लगातार आर्थिक और वित्तीय प्रतिबंधों के खतरों का सामना करते हुए, 20 अगस्त 2026 को इराक के एक सशस्त्र गुट ने भारी मात्रा में हथियार सरकार को सौंप दिए। अमेरिकी प्रतिनिधियों की मौजूदगी में सौंपे गए इन हथियारों में ड्रोन और मिसाइलें शामिल थीं। इन हथियारों की रेंज 250 किलोमीटर से भी ज्यादा बताई जा रही है, जो साल 2020 की हत्याओं के बाद से लगातार संख्या और तकनीकी रूप से आधुनिक होते जा रहे थे। इस तरह के घटनाक्रम से यह साफ जाहिर होता है कि क्षेत्रीय सुरक्षा की स्थिति लगातार नाजुक बनी हुई है और आने वाले दिनों में इसका असर व्यापार और आम जनजीवन पर भी पड़ सकता है।

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