ईरान ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करने के अपने फैसले का बचाव किया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाए ने एक इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका और इसराइल के हमलों के कारण उन्हें यह कदम उठाना पड़ा। इस तनाव के कारण भारत सहित कई देशों की चिंता बढ़ गई है क्योंकि यह रास्ता तेल और वैश्विक व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण है।

ईरान ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य क्यों बंद किया और अब उसकी क्या मांगें हैं?

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने India Today को बताया कि अमेरिका और इसराइल ने फारस की खाड़ी क्षेत्र में अपने ठिकानों से हमले किए थे, जिसके जवाब में ईरान को यह रास्ता बंद करना पड़ा। उन्होंने कहा कि ईरान के ये कदम अंतरराष्ट्रीय कानून के हिसाब से सही थे और व्यापार में रुकावट की ज़िम्मेदारी वाशिंगटन और तेल अवीव की है।

ईरानी राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने भी साफ किया कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों की मजबूती से रक्षा करेगा। ईरानी राज्य मीडिया के मुताबिक, ईरान ने शांति के लिए कुछ शर्तें रखी हैं जिनमें ये शामिल हैं:

  • युद्ध के लिए मुआवजे की मांग
  • हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पर पूर्ण संप्रभुता और नियंत्रण
  • लगाए गए सभी प्रतिबंधों को हटाना
  • ईरान की जमी हुई संपत्तियों को वापस करना

भारत और अन्य देशों पर इस विवाद का क्या असर पड़ेगा?

भारत के रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने चेतावनी दी कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में किसी भी तरह की रुकावट सीधे तौर पर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए खतरा है। इससे पहले 18 अप्रैल 2026 को भारतीय टैंकरों पर हमले की खबरों के बाद भारत ने ईरान के राजदूत को तलब किया था।

वहीं सऊदी अरब ने भी इस रास्ते के बंद होने पर चिंता जताई और खाड़ी देशों के इलाकों में हो रहे हमलों को तुरंत रोकने की मांग की। दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के शांति प्रस्ताव को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया और चेतावनी दी कि अगर बातचीत नाकाम रही तो बड़ी सैन्य कार्रवाई हो सकती है। अमेरिका ने 7 मई 2026 को ईरान के कुछ ठिकानों पर आत्मरक्षा में हमले भी किए थे क्योंकि उनके नेवी डिस्ट्रॉयर्स पर ड्रोन और मिसाइल से हमला हुआ था।

Frequently Asked Questions (FAQs)

हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद होने से भारत को क्या खतरा है?

भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अनुसार, इस रणनीतिक रास्ते में रुकावट आने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता को सीधा खतरा है क्योंकि भारत अपनी तेल जरूरतों के लिए इस मार्ग पर निर्भर है।

ईरान ने शांति प्रस्ताव में क्या शर्तें रखी हैं?

ईरान ने युद्ध के मुआवजे, हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पर पूरा नियंत्रण, प्रतिबंधों को हटाने और अपनी जमी हुई संपत्तियों को वापस पाने की मांग की है।

अमेरिका का इस विवाद पर क्या रुख है?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया है और इसे अनुपयुक्त बताया है। उन्होंने भविष्य में सैन्य कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।