ईरान ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों के लिए सर्विस फीस लगाने का ऐलान किया है। चीन में ईरान के राजदूत अब्दोलरेजा रहमनी फाज़ली ने शनिवार, 4 जुलाई 2026 को बीजिंग में यह घोषणा की। उन्होंने साफ किया कि जो देश ईरान के साथ अच्छे संबंध रखते हैं, उन्हें इस फीस में खास छूट और विशेष सुविधा मिलेंगी।
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क्यों लिया जाएगा यह शुल्क
राजदूत फाज़ली ने बताया कि ईरान इस जलमार्ग को अपना इलाका मानता है। इसलिए वह जहाजों से ‘टोल’ नहीं बल्कि ‘सर्विस फीस’ लेगा। इस फीस का इस्तेमाल निम्नलिखित कामों के लिए किया जाएगा:
- समुद्र में जहाजों के सुरक्षित रास्ते की गारंटी देना
- जहाजों की निगरानी और सुपरविजन करना
- जहाजों की भारी संख्या से पर्यावरण को होने वाले नुकसान को ठीक करना
दोस्त देशों को मिलेगा फायदा
ईरान ने कहा कि जिन देशों ने मुश्किल समय में उसका साथ दिया, उन्हें इस शुल्क में विशेष रियायत मिलेगी। चीन को ऐसे ही एक दोस्त देश के तौर पर देखा जा रहा है, जिसे फीस में विशेष छूट मिलने की उम्मीद है।
अमेरिका और खाड़ी देशों का विरोध
इस फैसले पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाराजगी है। अमेरिका ने ईरान के इस इरादे को पूरी तरह खारिज कर दिया है। अमेरिका का कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है और सर्विस फीस और टोल में कोई अंतर नहीं है। इसी तरह बहरीन और अन्य खाड़ी देशों ने भी साफ कहा है कि ईरान और ओमान इस रास्ते पर कोई शुल्क नहीं लगा सकते।
ओमान के साथ तालमेल और जहाजों की हलचल
रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान इस नए इंतजाम के लिए ओमान के साथ मिलकर काम कर रहा है, हालांकि ओमान ने भी जहाजों पर फीस लगाने का विरोध किया है। हाल ही में 3 और 4 जुलाई के बीच शिप-ट्रैकिंग डेटा में देखा गया कि कई जहाज ओमान की तरफ से वापस मुड़ गए और फिर ईरान के तट के पास वाले रास्तों का इस्तेमाल किया। हालांकि, जहाजों के इस तरह रास्ता बदलने की कोई आधिकारिक वजह नहीं बताई गई है।
क्या है पूरा मामला
यह घोषणा अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के एक पुराने समझौते के बाद आई है। उस समझौते में 60 दिनों तक कमर्शियल जहाजों को मुफ्त रास्ता देने की बात कही गई थी। अब उस समय सीमा के खत्म होने के बाद के इंतजामों को लेकर बातचीत चल रही है। कुछ यूरोपीय देश अब यह मान रहे हैं कि उन्हें ईरान और ओमान को कुछ शुल्क देना पड़ सकता है, लेकिन उन्होंने देशों के आधार पर भेदभावपूर्ण चार्ज लगाने का विरोध किया है।
