ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब समुद्र तक पहुँच गया है. ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए टोल टैक्स वसूलना शुरू किया है. दूसरी तरफ अमेरिका ने इस रास्ते पर कड़ी नाकाबंदी कर दी है और अपनी नौसेना को हमला करने का आदेश दिया है. इस खींचतान की वजह से समुद्री व्यापार लगभग रुक गया है.
ईरान का नया टोल टैक्स और नियम क्या हैं?
ईरान ने इस समुद्री रास्ते से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों और तेल टैंकरों पर ‘सुरक्षा और बीमा शुल्क’ लगाना शुरू किया है. ईरान के केंद्रीय बैंक ने पुष्टि की कि उन्हें अब विदेशी मुद्रा में यह पैसा मिल रहा है. यह शुल्क जहाज के वजन और उसमें लदे सामान के हिसाब से तय होता है. रूस जैसे मित्र देशों को इस टैक्स से छूट दी गई है.
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| शुल्क का नाम | सुरक्षा और बीमा शुल्क (Transit Toll) |
| भुगतान का तरीका | नकद विदेशी मुद्रा |
| छूट प्राप्त देश | रूस और अन्य मित्र देश |
| अधिकतम शुल्क | सुपरटैंकरों के लिए 20 लाख डॉलर तक |
| शुल्क का आधार | कार्गो प्रकार, टन भार और जोखिम स्तर |
| दैनिक जहाजों की संख्या | 140 से घटकर केवल 5 रह गई |
| अन्य प्रभाव | पनामा नहर में ट्रैफिक और शुल्क की वृद्धि |
अमेरिका ने क्या कदम उठाए और क्या है ट्रंप का आदेश?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी नौसेना को सख्त आदेश दिए हैं. उन्होंने कहा है कि जो भी नाव समुद्र में खदानें बिछाएगी या रास्ता रोकेगी, उसे देखते ही गोली मार दी जाए. अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने बताया कि अमेरिका ने एक ‘कठिन नाकाबंदी’ लागू की है. इस वजह से कई जहाजों को वापस लौटना पड़ा है. अमेरिकी सेना लगातार उन खदानों पर नजर रख रही है जो ईरान के IRGC ने समुद्र में बिछाई हैं.
व्यापार पर क्या असर पड़ा और अब क्या होगा?
तनाव की वजह से जहाजों की आवाजाही बहुत कम हो गई है. जहाँ पहले दिन में करीब 140 जहाज गुजरते थे, अब केवल 5 जहाज ही दिख रहे हैं. पनामा नहर के रास्ते अब ज़्यादा जहाज जा रहे हैं, जिससे वहां भीड़ बढ़ गई है. बीच में पाकिस्तान शांति वार्ता के लिए अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों को बुला रहा है. वहीं ईरान के अंदर भी इस मुद्दे पर विवाद चल रहा है, जहाँ IRGC और विदेश मंत्रालय के बीच मतभेद सामने आए हैं.