IAEA के डायरेक्टर जनरल Rafael Grossi ने साफ़ कर दिया है कि उनके इंस्पेक्टर जल्द ही ईरान के परमाणु केंद्रों का मुआयना करेंगे। हालांकि ईरान का कहना है कि अभी तक ऐसी किसी तारीख या समय पर बात नहीं हुई है। यह मामला अब अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक समझौते से जुड़ गया है।

टोक्यो में बोलते हुए Rafael Grossi ने कहा कि निरीक्षण ज़रूर होंगे, चाहे वह कल हों या अगले दस दिनों में। उन्होंने बताया कि अमेरिका और ईरान के राष्ट्रपतियों ने एक समझौते (MOU) पर दस्तखत किए हैं, जिसमें साफ़ लिखा है कि परमाणु सुविधाओं की निगरानी IAEA करेगा। ग्रोसी के मुताबिक, निगरानी करने के लिए केंद्रों का निरीक्षण करना ज़रूरी है।

दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baqaei ने इन खबरों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि क्षतिग्रस्त परमाणु केंद्रों के निरीक्षण के लिए कोई नियम या तरीका तय नहीं है और ग्रोसी के साथ इस पर कोई बैठक नहीं हुई है। ईरान का कहना है कि वह केवल अपने पुराने समझौतों का पालन करेगा।

अमेरिका की तरफ से भी इस मामले में अलग दावे किए गए हैं। अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने संकेत दिया कि ईरान इंस्पेक्टरों को वापस बुलाने के लिए मान गया है और चर्चाएं जल्द शुरू हो सकती हैं। वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि ईरान पूरी तरह से उच्च स्तर की जांच के लिए तैयार है और ईरान की तरफ से किया गया इनकार सिर्फ उनकी अंदरूनी राजनीति का हिस्सा है।

समझौते की मुख्य बातें

  • अंतरिम समझौता: 18 जून 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच एक शुरुआती समझौता हुआ था।
  • 60 दिन की समयसीमा: इस समझौते के तहत 60 दिनों के भीतर एक फाइनल डील करने की कोशिश की जाएगी।
  • मुख्य मुद्दे: इस बातचीत में यूरेनियम संवर्धन और परमाणु हथियार न बनाने की प्रतिबद्धता पर चर्चा होगी।

बता दें कि जून 2025 में हुए संघर्ष के बाद से ईरान ने कई साइटों पर इंस्पेक्टरों की एंट्री रोक रखी थी। फरवरी 2026 की एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई थी कि ईरान ने चार परमाणु केंद्रों तक पहुंच नहीं दी, जिससे IAEA के लिए यह जांचना मुश्किल हो गया कि वहां कोई परमाणु सामग्री हटाई तो नहीं गई।

IAEA बोर्ड ने भी जून 2026 में एक प्रस्ताव पास किया था, जिसमें ईरान पर पूरी तरह सहयोग करने का दबाव बनाया गया। ग्रोसी ने यह भी कहा कि आने वाला कोई भी नया परमाणु समझौता 2015 वाली डील से काफी अलग होगा, क्योंकि अब ईरान की परमाणु तकनीक पहले से बहुत आगे बढ़ चुकी है।