ईरान में महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ जनता का गुस्सा अब सड़कों पर हिंसक रूप ले चुका है। आर्थिक बदहाली से जूझ रही जनता जब अपनी मांगों को लेकर बाहर निकली, तो उसे भारी दमन का सामना करना पड़ा। इस समय पूरे देश में सबसे ज्यादा चर्चा उन मौतों की हो रही है, जो इन व्यापक विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हैं। हालात इतने नाजुक हो चुके हैं कि सुरक्षाबलों की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के बीच संघर्ष में मरने वालों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है, जिसने आम नागरिकों में भय का माहौल पैदा कर दिया है।

महज नौ दिनों के भीतर ही दर्जनों प्रदर्शनकारियों की मौत और 1200 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी ने बढ़ाई चिंता

साल 2025–2026 के दौरान भड़के इन ताजा विरोध प्रदर्शनों ने बेहद गंभीर मोड़ ले लिया है। अब तक सामने आई जानकारियों के मुताबिक, इन प्रदर्शनों में कम से कम 25 से 31 लोगों की जान जा चुकी है। स्थिति की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हिंसा के चरम पर पहुंचने के बाद, सिर्फ नौ दिनों के भीतर ही लगभग 29 प्रदर्शनकारियों के मारे जाने का दावा किया जा रहा है। वहीं, आंदोलन को कुचलने के लिए सुरक्षाबलों ने व्यापक स्तर पर धरपकड़ अभियान चलाया है, जिसके तहत 1,200 से अधिक लोगों को गिरफ्तार कर जेलों में डाल दिया गया है।

लोरिस्तान और इलाम जैसे प्रांतों में सुरक्षाबलों द्वारा सीधी गोलीबारी और पेलेट गन के इस्तेमाल से गई कई जानें

प्रदर्शनों के शुरुआती दिनों में ही हिंसा का दौर शुरू हो गया था। लोरिस्तान प्रांत के अज़ना, इलाम प्रांत के मलेकशाही और कुर्द बहुल इलाकों सहित कई शहरों में सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़पें देखने को मिलीं। रिपोर्ट्स बताती हैं कि कई जगहों पर भीड़ को नियंत्रित करने के नाम पर सुरक्षाबलों ने लाइव फायर (सीधी गोलीबारी), पेलेट गन और रबर की गोलियों का बेधड़क इस्तेमाल किया। इस कार्रवाई में बड़ी संख्या में लोग गंभीर रूप से घायल हुए, जिनमें से कुछ ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, तो कुछ की बाद में अस्पतालों में इलाज के दौरान मौत हो गई।

संयुक्त राष्ट्र ने खून-खराबा रोकने के लिए दी चेतावनी, मनमानी गिरफ्तारियों और बल प्रयोग पर तत्काल रोक लगाने की मांग

ईरान के भीतर बिगड़ते मानवाधिकार हालातों पर अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी सख्ती दिखाई है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक संस्थाओं ने ईरान सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि देश में और अधिक खून-खराबा रोकने के लिए बल प्रयोग तुरंत कम किया जाना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय मंचों से यह सलाह दी गई है कि सरकार दमन के बजाय प्रदर्शनकारियों के साथ संवाद का रास्ता अपनाए। इसके साथ ही, लगातार यह मांग उठ रही है कि ईरान इन हिंसक घटनाओं की स्वतंत्र जांच कराए, मृतकों की आधिकारिक और सही सूची सार्वजनिक करे तथा जारी मनमानी गिरफ्तारियों के सिलसिले पर तत्काल रोक लगाए।

GulfHindi Desk

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