ईरान में महंगाई ने अब तक का सबसे बुरा रिकॉर्ड बना दिया है। जून के महीने में महंगाई दर बढ़कर 88.6% पर पहुंच गई है। युद्ध की वजह से वहां के आम लोगों का जीना मुश्किल हो गया है और बुनियादी चीजों के दाम बहुत ज्यादा बढ़ गए हैं।
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Statistical Centre of Iran द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, यह बढ़ोतरी युद्ध की वजह से हुई है। इससे पहले फरवरी में महंगाई 68% थी, जो अब तेजी से बढ़ी है। दिसंबर 2025 में जब महंगाई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए थे, तब यह दर 52.6% थी।
महंगाई का असर और कीमतों में बढ़ोतरी
आम जनता के लिए सबसे बड़ी मुसीबत खाने-पीने की चीजों के दाम हैं। जून के महीने में कई जरूरी सामानों की कीमतें दोगुने से भी ज्यादा बढ़ गई हैं।
| चीज / समय | महंगाई दर / बढ़ोतरी |
|---|---|
| ब्रेड और अनाज | 138.8% |
| दूध, पनीर और अंडे | 151.9% |
| लाल मांस और पोल्ट्री | 178.2% |
| फरवरी (युद्ध से पहले) | 68% |
| दिसंबर 2025 | 52.6% |
| मई 2026 | 77.2% |
अर्थव्यवस्था और रोजगार पर मार
युद्ध ने ईरान के कारखानों को बहुत नुकसान पहुंचाया है। करीब 20,000 फैक्ट्रियां और औद्योगिक यूनिट्स या तो पूरी तरह तबाह हो गई हैं या उन्हें भारी नुकसान हुआ है। यह देश की कुल उत्पादन क्षमता का लगभग 20% हिस्सा है। डिप्टी लेबर मिनिस्टर Gholamhossein Mohammadi ने बताया कि युद्ध की वजह से कम से कम 10 लाख लोगों की नौकरियां चली गई हैं।
ईरान की कमाई का मुख्य जरिया तेल निर्यात भी पूरी तरह ठप हो गया है। फरवरी में जहां 21 लाख बैरल से ज्यादा तेल निर्यात होता था, वहीं मई 2026 तक यह घटकर शून्य पर आ गया। इसका मुख्य कारण अमेरिकी नौसेना द्वारा की गई नाकेबंदी है।
करेंसी में भारी गिरावट और सरकारी बयान
ईरानी रियाल की कीमत बहुत नीचे गिर गई है। अप्रैल के आखिर तक 1 अमेरिकी डॉलर के बदले रियाल की कीमत 19 लाख तक पहुंच गई थी। 2015 में यही कीमत सिर्फ 32,000 रियाल थी।
ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने मई में स्वीकार किया था कि कीमतें बढ़ेंगी और लोगों को इस मुश्किल समय को झेलना होगा। वहीं, सरकारी प्रवक्ता Fatemeh Mohajerani ने बताया कि युद्ध की वजह से देश को करीब 270 अरब अमेरिकी डॉलर का नुकसान हुआ है। सेंट्रल बैंक के गवर्नर Abdolnaser Hemmati ने राष्ट्रपति से जल्द शांति स्थापित करने और इंटरनेट सेवा बहाल करने की अपील की है ताकि अर्थव्यवस्था को संभाला जा सके।
